ज्येष्ठ माह 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ माह को अत्यंत महत्वपूर्ण और पुण्यदायी माना जाता है। यह महीना तप, दान और धार्मिक साधना के लिए विशेष फलदायी बताया गया है। इस दौरान पड़ने वाले व्रत और त्योहार न केवल धार्मिक आस्था से जुड़े होते हैं, बल्कि व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा भी लेकर आते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, ज्येष्ठ मास में यदि व्यक्ति अपनी राशि के अनुसार कुछ विशेष उपाय करता है, तो उसके जीवन की कई बाधाएं दूर हो सकती हैं और भाग्य का साथ मिलने लगता है।
इस पवित्र महीने में किए गए छोटे-छोटे उपाय भी कई गुना अधिक फल देने वाले माने जाते हैं। आने वाला विक्रम संवत 2083 का खास होने वाला है, क्योंकि इसमें अधिक मास (अतिरिक्त महीना) शामिल होगा, जिससे हिंदू नववर्ष 13 महीनों का होने वाला है। यह एक दुर्लभ खगोलीय और पंचांग संबंधी घटना मानी जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, विक्रम संवत 2083 में अधिक मास के कारण एक अतिरिक्त महीना होगा, जिसे मलमास या पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है।
ज्येष्ठ माह में आने वाले कई महत्वपूर्ण व्रत और पर्व, जैसे पद्मिनी एकादशी, अमावस्या, मिथुन संक्रांति आदि विशेष धार्मिक महत्व रखते हैं। इन पावन तिथियों पर पूजा-पाठ, दान और राशि अनुसार उपाय करने से व्यक्ति को आध्यात्मिक उन्नति के साथ-साथ जीवन में सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। विक्रम संवत 2083 में एक अनोखी घटना भी देखने को मिलेगी, जिसमें दो ज्येष्ठ महीने होने जा रहे हैं।
आज इस ब्लॉग में हम ज्येष्ठ मास से जुड़ी तमाम रोमांचक चीजों के बारे में विस्तार से बताएंगे, जैसे कि इस माह के दौरान कौन-कौन से व्रत-त्योहार आएंगे, इस माह में कौन से उपाय किए जाने चाहिए, इस माह का धार्मिक महत्व क्या है, और इस मास में जातकों को क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए। ऐसी ही कई जानकारियों से भरपूर है ॐ एस्ट्रो का यह विशेष ब्लॉग, इसलिए अंत तक ज़रूर पढ़ें।
ज्येष्ठ माह 2026: तिथि
इस वर्ष ज्येष्ठ माह में अधिक मास का संयोग बनने जा रहा है। ज्येष्ठ अधिक मास 17 मई 2026 से शुरू होकर 15 जून 2026 तक रहेगा। अधिक मास के कारण कई प्रमुख व्रत और त्योहार की तिथियां सामान्य समय से लगभग 15 से 20 दिन आगे खिसक जाएंगी। वहीं विक्रम संवत 2083 की शुरुआत 19 मार्च 2026 को होगी, जो गुड़ी पड़वा और चैत्र (वसंत) नवरात्रि के साथ प्रारंभ होगा। हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र मास की प्रतिपदा तिथि से ही चैत्र नवरात्रि का आरंभ माना जाता है। वर्ष 2026 में चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च 2026 तक मनाए जाएंगे।
ज्येष्ठ माह का महत्व
हिंदू पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह को अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी महीनों में से एक माना जाता है। यह समय तप, व्रत और धार्मिक साधना के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना गया है। इस महीने में किए गए धार्मिक कार्य, पूजा-पाठ और दान का फल कई गुना अधिक प्राप्त होता है।
ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ज्येष्ठ मास में भगवान की भक्ति करने, व्रत रखने और जरूरतमंदों की सहायता करने से जीवन में सुख-समृद्धि और मानसिक शांति प्राप्त होती है। इस महीने में विशेष रूप से जलदान, अन्नदान और गरीबों की सेवा करना अत्यंत पुण्यकारी माना गया है, क्योंकि यह समय गर्मी का होता है और जरूरतमंदों को सहायता देना धर्म का महत्वपूर्ण कार्य माना जाता है।
धार्मिक ग्रंथों में भी इस माह का विशेष महत्व बताया गया है। इस दौरान कई महत्वपूर्ण व्रत और पर्व आते हैं, जैसे निर्जला एकादशी, वट सावित्री व्रत, शनि जयंती और गंगा दशहरा। इन पावन तिथियों पर पूजा-अर्चना और दान करने से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है और कई प्रकार की परेशानियों से मुक्ति मिलने की मान्यता है। इस प्रकार ज्येष्ठ माह केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक उन्नति और पुण्य प्राप्ति के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
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ज्येष्ठ माह 2026 में आने वाले प्रमुख व्रत-त्योहार
| तिथि | दिन | व्रत व त्योहार |
| 27 मई, 2026 | सोमवार | मोहिनी एकादशी |
| 28 मई, 2026 | मंगलवार | प्रदोष व्रत (शुक्ल) |
| 01 जून, 2026 | शुक्रवार | वैशाख पूर्णिमा व्रत |
| 05 जून, 2026 | मंगलवार | संकष्टी चतुर्थी |
| 13 जून, 2026 | बुधवार | अपरा एकादशी |
| 14 जून, 2026 | गुरुवार | प्रदोष व्रत (कृष्ण) |
| 15 जून, 2026 | शुक्रवार | मासिक शिवरात्रि, वृषभ संक्रांति |
ज्येष्ठ माह में जन्म लेने वाले लोगों के गुण
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, ज्येष्ठ माह में जन्म लेने वाले लोग स्वभाव से साहसी, आत्मविश्वासी और परिश्रमी माने जाते हैं। इनमें नेतृत्व करने की स्वाभाविक क्षमता होती है और ये कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य बनाए रखते हैं। ऐसे लोग अपनी बात स्पष्ट रूप से कहना पसंद करते हैं और अपने लक्ष्य को पाने के लिए लगातार मेहनत करते हैं। इसके साथ ही, ज्येष्ठ माह में जन्में लोगों का स्वभाव दयालु और मददगार भी माना जाता है।
इनमें धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों के प्रति रुचि देखी जाती है और ये अपने परिवार व समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने वाले होते हैं। मेहनत और सकारात्मक सोच के कारण ये जीवन में धीरे-धीरे सफलता और सम्मान प्राप्त करते हैं।
ज्येष्ठ माह में पूजा का महत्व
हिंदू धर्म में ज्येष्ठ माह को तप, दान और भक्ति का विशेष समय माना जाता है। इस पवित्र माह में कई देवी-देवताओं की पूजा का महत्व बताया गया है। विशेष रूप से भगवान विष्णु, भगवान शिव और सूर्य देव की पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है। ज्येष्ठ माह में भगवान विष्णु की भक्ति करने से जीवन में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है। इस दौरान आने वाली निर्जला एकादशी का व्रत विशेष रूप से भगवान विष्णु को समर्पित होता है, जिसे रखने से सभी एकादशी व्रतों का पुण्य फल मिलने की मान्यता है।
वहीं भगवान शिव की पूजा करने से मन की शांति और कष्टों से मुक्ति मिलती है। इसके अलावा सुबह के समय सूर्य देव को जल अर्पित करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है, जिससे स्वास्थ्य, ऊर्जा और आत्मबल में वृद्धि होती है। इस प्रकार ज्येष्ठ माह में इन देवताओं की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होने की मान्यता है।
ज्येष्ठ माह के दौरान इन बातों का रखें ध्यान
हिंदू पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह को तप, दान और धर्म-कर्म के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दौरान व्यक्ति को अपने आचरण और दिनचर्या में कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना चाहिए। जिससे आध्यात्मिक लाभ प्राप्त हो सके और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहे।
ज्येष्ठ माह में विशेष रूप से दान-पुण्य करना शुभ माना जाता है। इस समय गर्मी अधिक होती है, इसलिए जरूरतमंद लोगों को जल, फल और अन्न का दान करना पुण्यकारी माना जाता है। साथ ही, सुबह जल्दी उठकर स्नान करना, भगवान का स्मरण करना और विशेष रूप से सूर्य देव को जल अर्पित करना भी शुभ फल देने वाला माना जाता है।
इसके अलावा इस माह में क्रोध, कटु वचन और किसी का अपमान करने से बचना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दौरान संयमित जीवन जीना, सात्विक भोजन करना और अधिक से अधिक पूजा-पाठ व भक्ति में समय देना व्यक्ति के लिए लाभकारी माना जाता है। ऐसा करने से जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आने की मान्यता है।
ज्येष्ठ माह में इन मंत्रों का करें जाप
हिंदू धर्म में ज्येष्ठ माह को भक्ति, तप और साधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दौरान किए गए मंत्र जप का विशेष फल मिलता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि व्यक्ति इस माह में श्रद्धा और नियम के साथ भगवान के मंत्रों का जाप करता है, तो उसे मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक उन्नति की प्राप्ति होती है।
ज्येष्ठ माह में विशेष रूप से भगवान विष्णु का मंत्र “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” जपना अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके साथ ही भगवान शिव का महामंत्र “ॐ नमः शिवाय” का जाप करने से जीवन के कष्टों से मुक्ति और मन को शांति मिलने की मान्यता है। वहीं प्रतिदिन सुबह सूर्य देव को जल अर्पित करते समय “ॐ सूर्याय नमः” मंत्र का जाप करने से ऊर्जा, आत्मबल और स्वास्थ्य में वृद्धि होती है। धार्मिक मान्यता है कि ज्येष्ठ माह में इन मंत्रों का नियमित जाप करने से भगवान की कृपा प्राप्त होती है और व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।
ज्येष्ठ माह 2026 में राशि अनुसार करें ये ख़ास उपाय
मेष राशि
मेष राशि के जातकों को ज्येष्ठ माह में प्रतिदिन सुबह सूर्य देव को जल अर्पित करना चाहिए। इससे आत्मविश्वास बढ़ता है और जीवन में आने वाली बाधाएं धीरे-धीरे दूर होने लगती है।
वृषभ राशि
वृषभ राशि के लोगों को इस माह में माता लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए और शुक्रवार के दिन सफेद मिठाई का दान करना शुभ माना जाता है। इससे आर्थिक स्थिति मजबूत होने की मान्यता है।
मिथुन राशि
मिथुन राशि के जातकों को भगवान गणेश की पूजा करनी चाहिए और “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप करना चाहिए। इससे कार्यों में आने वाली रुकावटें दूर होने लगती हैं।
कर्क राशि
कर्क राशि के लोगों को ज्येष्ठ माह में भगवान शिव को जल अर्पित करना चाहिए और “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करना लाभकारी माना जाता है। इससे मन की शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।
सिंह राशि
सिंह राशि के जातकों को प्रतिदिन सुबह सूर्य देव को जल अर्पित करना चाहिए। इससे सम्मान, आत्मबल और करियर में प्रगति मिलने की संभावना बढ़ती है।
कन्या राशि
कन्या राशि के लोगों को भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए और पीली वस्तुओं का दान करना शुभ माना जाता है। इससे जीवन में सुख और समृद्धि आती है।
तुला राशि
तुला राशि के जातकों को ज्येष्ठ माह में माता लक्ष्मी करना शुभ माना जाता है। शुक्रवार के दिन सुहागिन महिलाओं को श्रृंगार की वस्तुएं या मिठाई दान करने से आर्थिक स्थिति में सुधार और घर में सुख-समृद्धि बढ़ने की मान्यता है।
वृश्चिक राशि
वृश्चिक राशि के लोगों को इस माह में भगवान शिव की आराधना करनी चाहिए। प्रतिदिन शिवलिंग पर जल अर्पित करें और “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें। इससे जीवन की बाधाएं दूर होने और मानसिक शांति मिलने की मान्यता है।
धनु राशि
धनु राशि के जातकों के लिए ज्येष्ठ माह में भगवान विष्णु की पूजा करना लाभकारी माना जाता है। गुरुवार के दिन पीले वस्त्र पहनें और जरूरतमंदों को केले या पीली वस्तुओं का दान करें। इससे भाग्य का साथ मिलने और कार्यों में सफलता मिलने की मान्यता है।
मकर राशि
मकर राशि के लोगों को इस माह में शनि देव की पूजा करनी चाहिए। शनिवार के दिन सरसों के तेल का दीपक जलाना और गरीबों को काले तिल या कंबल का दान करना शुभ माना जाता है। इससे जीवन की परेशानियां कम होने की मान्यता है।
कुंभ राशि
कुंभ राशि के जातकों को ज्येष्ठ माह में भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए। सोमवार के दिन शिवलिंग पर जल और बेलपत्र अर्पित करने से सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होने लगती हैं।
मीन राशि
मीन राशि के लोगों को इस पवित्र माह में भगवान विष्णु की पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है। नियमित रूप से “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें और गरीबों को अन्न दान करें। इससे सुख-समृद्धि और मानसिक शांति प्राप्त होने की मान्यता है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
वर्ष 2026 में ज्येष्ठ अधिक मास 17 मई 2026 से शुरू होकर 15 जून 2026 तक रहेगा। इस वर्ष अधिक मास के कारण ज्येष्ठ मास का विशेष महत्व रहेगा।
हिंदू धर्म में ज्येष्ठ माह को तप, दान और भक्ति के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है। इस महीने में पूजा-पाठ, व्रत और दान करने से कई गुना अधिक पुण्य फल प्राप्त होने की मान्यता है।
ज्येष्ठ माह में मोहिनी एकादशी, प्रदोष व्रत, संकष्टी चतुर्थी, अपरा एकादशी, मासिक शिवरात्रि और संक्रांति जैसे कई महत्वपूर्ण व्रत-त्योहार आते हैं, जिनका विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है।

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