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पीपल का पेड़ और पीपल के टोटके OmAsttro

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पीपल का पेड़ और पीपल के टोटके

पीपल के पेड़ का हिन्दू धर्म में बड़ा महत्व है क्योंकि पीपल को देव वृक्ष माना गया है। मान्यता है कि इसमें समस्त देवी-देवता निवास करते हैं इसलिए लोग इसकी पूजा-अर्चना करते हैं। वैसे पीपल का पेड़ केवल धार्मिक रूप से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि ज्योतिषीय, आयुर्वेद और वैज्ञानिक दृष्टि से भी इसका बड़ा महत्व है। यह बरगद और गूलर की प्रजाति का विशाल वृक्ष होता है और इसकी आयु बहुत लंबी होती है। शास्त्रों में बताया गया है कि पीपल का पेड़ लगाने से व्यक्ति दीर्घायु होता है और उसके वंश का नाश नहीं होता है। पीपल के टोटके करने से दुख के समय में राहत मिलती है, साथ ही इस वृक्ष की सेवा करने से व्यक्ति का जीवन कष्टों से मुक्त हो जाता है परंतु ध्यान रहे, पीपल के पेड़ को घर से दूर ही लगाना चाहिए। क्योंकि घर पर पीपल की छाया पड़ने से वास्तु दोष उत्पन्न हो सकता है।

Peepal ka ped aur peepal ke totke

पीपल का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यता के अनुसार शनिवार को पीपल की पूजा करना और उसकी परिक्रमा लगाना अति शुभ माना गया है। शास्त्रों में वर्णन है कि पीपल की पूजा केवल शनिवार को ही करनी चाहिए। पौराणिक कथा के अनुसार समुद्र मंथन के समय लक्ष्मी जी से पूर्व उनकी बड़ी बहन दरिद्रा उत्पन्न हुई, इसके बाद लक्ष्मी जी। लक्ष्मी जी ने श्री विष्णु से विवाह कर लिया। इससे दरिद्रा नाराज़ हो गईं। तब श्री विष्णु ने दरिद्रा को अपने प्रिय वृक्ष और वास स्थान यानि पीपल में रहने का आग्रह किया और कहा कि तुम यहां वास और आराधना करो। मैं समय-समय पर तुमसे मिलने आता रहूँगा, लक्ष्मी जी ने भी कहा कि मैं प्रत्येक शनिवार तुमसे मिलने पीपल के वृक्ष पर आया करूँगी। इसलिए कहा जता है कि शनिवार के दिन श्री विष्णु और लक्ष्मी जी पीपल के तने में निवास करते हैं। इस वजह से शनिवार को पीपल की पूजा, दीपदान, जल व तेल चढ़ाने और परिक्रमा लगाने से पुण्य फल की प्राप्त होती है। भगवान लक्ष्मी-नारायण और शनि देव प्रसन्न होते हैं।

पीपल के पेड़ की पूजा विधि

  • सूर्योदय से पहले स्नान आदि नित्य कर्मों से निवृत्त हो जाएं।
  • पीपल की जड़ में गाय का दूध, तिल और चंदन मिला हुआ पवित्र जल अर्पित करें।
  • जल अर्पित करने के बाद जनेऊ फूल व प्रसाद चढ़ाएं।
  • धूप-बत्ती व दीप जलाएं।
  • आसन पर बैठकर या खड़े होकर मंत्र जप करें या इष्ट देवी-देवताओं का स्मरण करें।
  • मंत्र :
    मूलतो ब्रह्मरूपाय मध्यतो विष्णुरूपिणे।
    अग्रत: शिवरूपाय वृक्षराजाय ते नम:।।

    आयु: प्रजां धनं धान्यं सौभाग्यं सर्वसम्पदम्।
    देहि देव महावृक्ष त्वामहं शरणं गत:।।

  • . मंत्र जपने के बाद आरती करें और फिर बाद में प्रसाद का वितरण करें। इस प्रकार पीपल की पूजा करने पर घर में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है।

पीपल के फायदे

पृथ्वी पर पाए जाने वाले सभी वृक्षों में केवल पीपल को प्राणवायु यानि ऑक्सीजन को शुद्ध करने वाले पेड़ों में सर्वोत्तम माना जाता है। पीपल ही एक ऐसा पेड़ है जो चौबीसों घंटे ऑक्सीजन उत्सर्जित करता रहता है, जबकि अन्य वृक्ष रात में कार्बन डाईऑक्साइड या फिर नाइट्रोजन गैस छोड़ते हैं। इसके साथ ही पीपल को सबसे बड़ा पर्यावरण हितैषी वृक्ष माना जाता है, क्योंकि पर्यावरण को शुद्ध करने में इसकी अहम भूमिका है।

पीपल के औषधीय गुण

आयुर्वेदिक औषधि के रूप में भी पीपल के वृक्ष को बहुत ही कारगर माना गया है। इसके औषधीय गुण कई रोगों को दूर करने में सक्षम है। जैसे :-

श्वास संबंधी बीमारी के लिए है रामबाणः यदि पीपल के पेड़ की छाल का अंदरूनी हिस्सा निकालकर सुखा लें और सूखे हुए इस भाग का चूर्ण बनाकर खाएँ तो इससे श्वास संबंधी दमा रोग समेत कई समस्याएं दूर हो जाती है। इसके अलावा इसके पत्तों का दूध उबालकर पीना दमा के रोग में लाभकारी होता है।

पेट संबंधी विकारों का करता है दूरः पीपल की पत्तियों को पित्त नाशक कहा जाता है। पीपल के पत्ते पेट संबंधी समस्या जैसे गैस और कब्ज़ को दूर करने में सहायक होते हैं। इसके ताजे पत्तों का रस निकालकर पीने से पेट संबंधी विकार दूर हो जाते हैं।

दांतों को बनाएं मोतियों सा चमकदारःपीपल के वृक्ष की टहनियों से दातून करने से दांत मोतियों की तरह सफेद हो जाते हैं। इसके अलावा इससे दांत मजबूत होते हैं और दांत दर्द से राहत पाने के लिए भी यह बेहद अचूक औषधि है।

विष के प्रभाव को करता है कमः किसी व्यक्ति को कोई ज़हरीला जीव-जंतु काट ले तो पीड़ित व्यक्ति को थोड़े-थोड़े समय के अंतराल में पीपल के पत्तों का रस पिलाते रहें। इससे ज़हर का असर कम हो जाता है।

सर्दी-जुकाम में लाभकारी: सर्दी-जुकाम जैसी समस्याओं में भी पीपल अचूक औषधि है। पीपल के पत्तों को छांव में सुखाकर, इसके सूखे हुए पत्तों को मिश्री के साथ पीसकर इसका काढ़ा बनाकर पीने से सर्दी-जुकाम समाप्त हो जाता है।

त्वचा को बनाए सुंदरः त्वचा सुंदर बनाने के लिए भी पीपल की छाल का लेप या फिर इसके पत्तों का प्रयोग होता है। इसके अलावा यह त्वचा की झुर्रियों को कम करने में भी सहायक है।

तनाव को भगाता है दूरःपीपल की छाल एवं पत्ती में एंटी ऑक्सीडेंट तत्व पाया जाता है। यदि रोज़ाना पीपल की कोमल पत्तियों को चबाया जाए तो यह तनाव को दूर करता है और बढ़ती उम्र में भी ताजगी और स्फूर्ति को बरकरार रखता है।

फटी एड़ियों की है दवाः फटी एड़ियों में इसके पत्तों का रस लगाने से काफी आराम मिलता है और इसके प्रभाव से एड़ियां कोमल होती हैं।

पीलिया के लिए है असरदारः पीलिया से पीड़ित व्यक्ति को यदि पीपल के 3-4 पत्तों का रस मिश्री के साथ दिन में दो बार पिलाया जाए और ऐसा 4 से 5 दिन तक करने से, रोगी व्यक्ति को पीलिया में लाभ मिलता है।

वाणी संबंधी समस्या होती है दूरःपीपल के पके हुए फलों को सुखाकर बनाए गए चूर्ण को शहद के साथ खाने से हकलाने की समस्या दूर होती है।

ज्योतिषीय उपाय

  • जो व्यक्ति नियमित रूप (रविवार को छोड़कर) से पीपल के वृक्ष को जल अर्पित करता है उसकी कुंडली से ग्रहों का अशुभ प्रभाव कम हो जाता है।
  • पीपल की परिक्रमा करने से कुंडली में काल सर्पदोष से मुक्ति मिलती है।
  • शनिवार के दिन पीपल को दोनों हाथों से स्पर्श करते हुए ॐ नमः शिवाय मंत्र का 108 बार जाप करने से ग्रह दोषों से मुक्ति मिलती है।
  • पीपल की रोपाई और उसका संवर्द्धन करने से कुंडली में पितृ दोष दूर होता है।
  • शनि की साढ़े साती और ढैया के प्रभाव से बचने के लिए हर शनिवार को पीपल के पेड़ पर गुड़, दूध मिश्रित जल चढ़ाकर उसकी सच्ची श्रद्धा के साथ आराधना करें। फिर पीपल की सात बार परिक्रमा करें। शाम को सरसों के तेल का दीपक जलाएं। ये नियम करने से शनि के सभी दोषों से मुक्ति मिलती है।

पीपल के टोटके

  • यदि कोई व्यक्ति पीपल के वृक्ष पर शिवलिंग को स्थापित कर उसकी नित्य पूजा आराधना करता है तो उसे भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है।
  • जो व्यक्ति सावन के सभी शनिवार को पीपल की आराधना करके उसके नीचे हनुमान चालीसा का पाठ करता है तो उसके सभी संकट दूर हो जाते हैं।
  • पीपल के नीचे इसके 11 पत्तों को तोड़कर चंदन की स्याही से इन पर जय श्री राम लिखें और इन पत्तों की माला बनाकर हनुमान जी को अर्पित करें। इससे आपकी सारी विपदा दूर हो जाएंगी।
  • शनिवार के दिन पीपल के वृक्ष के नीचे हनुमान चालीसा का पाठ और गायत्री मंत्र का जाप करने से भय से मुक्ति मिलती है।
  • माँ लक्ष्मी जी का आशीर्वाद पाने के लिए शनिवार के दिन पीपल की विधिवत आराधना कर माँ लक्ष्मी का स्मरण करें। ऐसा करने से जीवन में धन, वैभव और संपन्नता आएगी।
  • संतान प्राप्ति के लिए पीपल के एक पत्ते को प्रतिदिन एक घंटे तक जल से भरे पात्र में रखें। फिर इस जल से पत्ते को निकालकर पेड़ पर रखें और इस जल को दंपति पीएं। ऐसा 3-4 माह तक लगातार करें। इस टोटके से उनकी सूनी गोद भर जाएगी।
  • यदि किसी व्यक्ति का रोग लंबे समय से ठीक नहीं हो रहा है तो उसके तकिया के नीचे पीपल की जड़ रखें। उसको स्वास्थ्य लाभ मिलने लगेगा।
  • व्यापार में वृद्धि हेतु प्रत्येक शनिवार को पीपल के एक पत्ते पर अनार की टहनी की कलम और चंदन की स्याही से स्वास्तिक का चित्र बनाएं और अपने व्यापारिक प्रतिष्ठान पर उस पत्ते को रख दें। ऐसा 7 शनिवार तक लगातार करें और सभी पत्तों को पास रख लें, फिर आठवें शनिवार को उन पत्तों को किसी सूनसान जगह पर डालकर मन में अपनी मनोकामना को दोहराएं, शीघ्र ही आपके व्यापार में बरकत होने लगेगी।

पीपल का धार्मिक महत्व

शास्त्रों के अनुसार शनिवार को पीपल पर माँ लक्ष्मी जी का वास होता है। इस दिन पीपल को जल अर्पित करना बहुत ही शुभ माना जाता है, लेकिन रविवार को पीपल पर जल चढ़ाना निषेध है। ऐसा कहा जाता है कि रविवार को पीपल पर जल चढ़ाने से जीवन में दरिद्रता का आगमन होता है। इसके अलावा पीपल के वृक्ष को कभी नहीं काटना चाहिए। ऐसा करने से पितरों को कष्ट मिलते हैं तथा वंशवृद्धि में हानि होती है। लेकिन किसी विशेष प्रयोजन के लिए विधिवत तरीके से पूजन और यज्ञ करने के बाद पीपल के पेड़ और लकड़ी को काटने पर दोष नहीं लगता है।

हम आशा करते हैं कि देव वृक्ष पीपल पर लिखा गया यह लेख आपको पसंद आया होगा। OmAsttro की ओर से आपको सुखद भविष्य की शुभकामनाएं !

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