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कब है आषाढ़ अमावस्या 2026 में? जानें इस दिन की तिथि, मुहूर्त एवं पितृ पूजा का महत्व!

Om Asttro Universe Team



आषाढ़ अमावस्या 2026: सनातन धर्म में पूर्णिमा और अमावस्या तिथि को महत्वपूर्ण माना जाता है जो हर माह आती है। यह पूर्ण रूप से चंद्रमा की स्थिति पर आधारित होती है। बता दें कि हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि को अशुभ माना जाता है इसलिए इस दिन शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं। हालांकि, यह दिन पितृ पूजन के लिए पुण्यदायी माना जाता है। अमावस्या तिथि आत्मचिंतन, भावनात्मक शुद्धि और कर्मों पर विचार करने से जुड़ी होती है। साल भर में आने वाली 12 अमावस्या तिथियों में से आषाढ़ अमावस्या को महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि यह श्रावण माह के शुरू होने से ठीक पहले आती है इसलिए इसका आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्व बताया गया है।

आषाढ़ अमावस्या की रात में एक विशेष शांति और स्थिरता का आभास होता है। इस रात्रि में जब आसमान से चंद्रमा लुप्त होता है, तब बाहरी ऊर्जा शांत मानी जाती है जिससे व्यक्ति का ध्यान बाहरी दुनिया से हटकर अध्यात्म के प्रति बढ़ने लगता है। इसी वजह से ज्योतिष में अमावस्या की अवधि को रुक कर सोचने, आत्मचिंतन करने और अपनी ऊर्जा एवं विचारों को संतुलित करने का समय माना जाता है।

आषाढ़ अमावस्या 2026 केवल धार्मिक कार्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आंतरिक सुरक्षा को परिवर्तित करने, पूर्वजों की कृपा प्राप्त करने और मानसिक संतुलन पाने का समय होता है। OMASTTRO UNIVERSE के इस ब्लॉग में आपको “आषाढ़ अमावस्या 2026” से जुड़ी समस्त जानकारी जैसे तिथि, समय, ज्योतिषीय महत्व, पूजा-विधि और नियम आदि प्राप्त होगी।

आषाढ़ अमावस्या 2026: तिथि और समय

हिंदू पंचांग के अनुसार, आषाढ़ माह की अमावस्या को आषाढ़ अमावस्या कहा जाता है जो इस साल 14 जुलाई 2026 को मनाई जाएगी। 

आषाढ़ अमावस्या 2026 की तिथि: 14 जुलाई 2026

अमावस्या तिथि प्रारंभ: 13 जुलाई 2026 की शाम 6 बजकर 52 मिनट से,

अमावस्या तिथि समाप्त: 14 जुलाई 2026 की दोपहर 3 बजकर 15 मिनट तक 

जैसे कि हम जानते हैं हिंदू धर्म में व्रत एवं त्योहार उदया तिथि के आधार पर मनाए जाते हैं। इसी क्रम में, आषाढ़ अमावस्या उदया तिथि के अनुसार 14 जुलाई 2026 को पड़ेगी इसलिए इस दिन व्रत और पूजा-पाठ करना शुभ माना जाएगा। ज्योतिष के अनुसार, यह समय कृष्ण पक्ष की समाप्ति का प्रतीक माना जाता है। 

आषाढ़ अमावस्या 2026 का महत्व

अमावस्या तिथि को अक्सर चंद्रमा की एक सामान्य अवस्था माना जाता है। लेकिन वैदिक ज्योतिष में इसका गहरा महत्व बताया गया है। बता दें कि इस तिथि पर चंद्रमा सूर्य के बेहद करीब चला जाता है। ज्योतिष में चंद्र ग्रह को मन और भावनाओं के कारक ग्रह कहा जाता है। जब सूर्य और चंद्रमा एक साथ आते हैं, तब बाहरी स्पष्टता में कमी देखने को मिलती है, परंतु व्यक्ति के भीतर जागरूकता में वृद्धि होती है।

इसी कारण से आषाढ़ अमावस्या 2026 को आत्मचिंतन, भावनात्मक शुद्धि और आध्यात्मिक ऊर्जा से संबंधित समय माना जाता है। आषाढ़ अमावस्या का महत्व विशेष रूप से इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह वर्षा ऋतु के दौरान और श्रावण माह शुरू होने से ठीक पहले आती है जो भक्ति, धर्म-कर्म और अनुशासन का बेहतरीन समय मान गया है।

आषाढ़ अमावस्या पर पितृ पूजन का महत्व

वर्ष भर में आने वाली प्रत्येक अमावस्या पितृ पूजा और तर्पण के लिए सर्वश्रेष्ठ होती है। ऐसे में, यह दिन पितृ पूजा यानी पूर्वजों की आराधना की दृष्टि से महत्वपूर्ण होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हमारे पूर्वज अप्रत्यक्ष रूप से हमारे जीवन को प्रभावित करते हैं। जब हमें उन्हें श्रद्धा और कृतज्ञता के साथ याद किया जाता है, तो इससे न सिर्फ़ उनकी आत्मा को शांति मिलती है, बल्कि घर-परिवार में भी सुख-शांति बनी रहती है। 

आषाढ़ अमावस्या 2026 पितृ तर्पण, श्राद्ध कर्म और पूर्वजों के नाम पर दान करने के लिए अत्यंत शुभ होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस अमावस्या तिथि पर अपनी क्षमता के अनुसार भोजन, वस्त्र और जरूरत की चीजों का दान करने से पितरों को शांति मिलती है। साथ ही, कुंडली में उपस्थित पितृ दोष से राहत मिलती है और मनुष्य जीवन में उत्पन्न समस्याओं का अंत होता है।

आषाढ़ अमावस्या 2026 पर अवश्य करें ये कार्य 

आषाढ़ अमावस्या के दिन किए जाने वाले नियम और पूजा विशेष महत्व रखते हैं, परन्तु इन्हें सही तरीके से किया जाना चाहिए।

  • आषाढ़ अमावस्या तिथि के अवसर पर जातक को सुबह-सवेरे उठकर स्नान करना चाहिए।
  • यदि संभव हो, तो किसी पवित्र नदी, तालाब या कुंड में स्नान करें। अगर आप ऐसा न कर सके, तो स्नान के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। 
  • स्नान करने के बाद सूर्य देव को अर्घ्य दें। 
  • इसके बाद दक्षिण दिशा की ओर मुख करके जल में काले तिल मिलाकर पितरों को तर्पण करें। 
  • आषाढ़ अमावस्या पर व्रत रख सकते हैं और अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंद लोगों को भोजन, वस्त्र और धन आदि का दान करें। 
  • शाम के समय पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं और पितरों को याद करते हुए परिक्रमा करें। 
  • साथ ही, इस दिन “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें। 

आषाढ़ अमावस्या पर इन कार्यों को करने से बचें 

आषाढ़ अमावस्या के दिन कुछ कार्य न करने की सलाह दी जाती है जो कि इस प्रकार हैं:

  • आषाढ़ अमावस्या के शुभ अवसर पर मांसाहार, प्याज-लहसुन और शराब जैसी तामसिक चीज़ों का सेवन करने से बचें। 
  • इस तिथि पर क्रोध, बहस और विवादों से दूर रहना चाहिए। 
  • आषाढ़ अमावस्या 2026 के दिन कोई नया, शुभ या महत्वपूर्ण कार्य शुरू करने से बचना चाहिए। 
  • इस तिथि पर अपने शब्दों या व्यवहार से किसी को भी ठेस न पहुंचाएं। संभव हो, तो पूरे दिन शांति एवं विनम्रता बनाए रखने का प्रयास करें।
  • आप अधिक मात्रा में भोजन या भारी भोजन के सेवन से परहेज़ करें। अगर आप व्रत नहीं रख सकते हैं, तो हल्का और सात्विक भोजन ग्रहण करें। 
  • आषाढ़ अमावस्या पर नकारात्मक विचारों और तनाव से दूर रहें। साथ ही, मन को शांत रखने की कोशिश करें। 
  • इस दिन ब्रह्मचर्य का पालन करें। 
  • आषाढ़ माह की अमावस्या पर अनावश्यक यात्रा करने या बाहर घूमने से बचें। 

हम उम्मीद करते हैं कि आपको हमारा यह ब्लॉग ज़रूर पसंद आया होगा। अगर ऐसा है तो आप इसे अपने अन्य शुभचिंतकों के साथ ज़रूर साझा करें। धन्यवाद!

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. आषाढ़ अमावस्या 2026 में कब है?

इस साल आषाढ़ अमावस्या 14 जुलाई 2026 को मनाई जाएगी। 

2. आषाढ़ अमावस्या 2026 की तिथि कब से कब तक रहेगी?

आषाढ़ अमावस्या 13 जुलाई 2026 की शाम 6 बजकर 52 मिनट से 14 जुलाई 2026 की दोपहर 3 बजकर 15 मिनट तक रहेगी। 

3. आषाढ़ अमावस्या का महत्व क्या है?

आषाढ़ अमावस्या मुख्य रूप से पितृ तर्पण, पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त करने और आध्यात्मिक शुद्धि के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।

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