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इस दिन से शुरू हो जाएगा चातुर्मास, अगले चार महीने के लिए लग जाएगी शुभ कार्यों पर रोक!

Om Asttro Universe Team



 चातुर्मास 2026: सनातन धर्म में चातुर्मास चार माह की एक ऐसी अवधि होती है जो धार्मिक और आध्यात्मिक रूप से विशेष महत्व रखती है। यह वह समाय होता है जब भगवान विष्णु की उपासना की जाती है और विशेष नियमों का पालन किया जाता है। मान्यताओं के अनुसार, चातुर्मास में जगत के पालनहार भगवान विष्णु योगनिद्रा में होते हैं इसलिए इस दौरान किसी भी तरह का शुभ और मांगलिक कार्य नहीं किया जाता है।

बता दें कि चातुर्मास को चौमासा के नाम से भी जाना जाता है और इसका आरंभ देवशयनी एकादशी से हो जाता है। धार्मिक ग्रंथों में, चातुर्मास के दौरान बताए गए नियमों और सावधानियों का पालन करना बेहद आवश्यक होता है, ताकि आपको पुण्यफल मिल सके। साथ ही, इस अवधि में विष्णु चालीसा का पाठ करना बहुत शुभ होता है और इसके प्रभाव से आपके सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं। 

जैसे कि हमने आपको बताया कि चातुर्मास अर्थात चार महीनों की वह अवधि जिसमें शुभ एवं मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं। लेकिन क्या अपने मन में भी यह सवाल उठ रहे हैं कि आख़िर चातुर्मास के दौरान शुभ और मांगलिक कार्यों पर रोक क्यों लग जाती है? इस साल चातुर्मास की शुरुआत कब से होगी? इस अवधि में किन कार्यों को करने से आपको शुभ फलों की प्राप्ति होगी? तो इन सबके जवाब आपको हमारे इस ब्लॉग में मिलेंगे। OMASTTRO UNIVERSE “चातुर्मास 2026” का यह स्पेशल ब्लॉग अपने पाठकों के लिए लेकर आया है जिसके अंतर्गत आपको चातुर्मास से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होगी। तो आइए बिना देर किए आगे बढ़ते हैं और जान लेते हैं चातुर्मास 2026 के बारे में सब कुछ। 

कब से शुरू है चातुर्मास 2026 में?

चातुर्मास, हिंदू धर्म में चार माह का वह समय होता है जब जगत के संचालक भगवान श्रीहरि विष्णु चार महीने के लिए योगनिद्रा में रहते हैं। साथ ही, विष्णु जी के साथ-साथ देवी लक्ष्मी समेत अन्य देवी-देवता भी योगनिद्रा में होते हैं इसलिए इन चार माह के दौरान विवाह, मुंडन, हवन जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक वर्ष आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी से कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी तक चातुर्मास चलता है। सरल शब्दों में कहें, तो चातुर्मास देवशयनी एकादशी से देवउठनी तक रहता है। इस साल चातुर्मास का आरंभ देवशयनी एकादशी को 25 जुलाई 2026 से होगा जबकि इसका समापन 12 नवंबर 2026 को देवउठनी एकादशी के साथ हो जाएगा।

चातुर्मास में पड़ने वाले 4 हिंदू माह 

चातुर्मास चार महीने की अवधि होती है जो आषाढ़ शुक्ल एकादशी से कार्तिक शुक्ल एकादशी तक चलता है। इन चार माह में पड़ने वाले हर माह का धार्मिक रूप से अपना महत्व होता है। बता दें कि चातुर्मास के चार महीनों में श्रावण, भाद्रपद, अश्विन और कार्तिक माह आते हैं। इसी क्रम में, आषाढ़ माह में भगवान विष्णु योगनिद्रा में प्रवेश करते हैं और मानसून की शुरुआत भी इस महीने होती है। इसके बाद, भगवान शिव का प्रिय महीना सावन आता है और मान्यताओं के अनुसार, चातुर्मास में सृष्टि का कार्यभार भगवान शिव संभालते हैं। 

इसके पश्चात, भाद्रपद माह में गणेश पूजा की जाती है और इनके पूजन से जीवन में उत्पन्न बाधाओं और समस्याओं का अंत होता है। वहीं, आश्विन माह से त्योहारों का मौसम शुरू होता है और माता दुर्गा का धरती पर आगमन होता है जबकि कार्तिक मास में दिवाली, भाई दूज जैसे बड़े पर्व मनाए जाते हैं और इसी महीने की देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा से जागते हैं। इसी के साथ, शुभ और मांगलिक कार्यों का पुनः आरंभ हो जाता है। 

शुभ योग में होगा चातुर्मास 2026 का आरंभ

वर्ष 2026 का चातुर्मास बेहद ख़ास रहने वाला है क्योंकि इस साल चातुर्मास का आरंभ बहुत शुभ माने जाने वाले ब्रह्म योग में होने जा रहा है। बता दें कि चातुर्मास की शुरुआत 25 जुलाई 2026 को देवशयनी एकादशी से होगी और इस पूरे दिन ब्रह्म योग रहेगा। ब्रह्म योग में भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करने से जातक को अपार पुण्य और सकारात्मक परिणामों की प्राप्ति होती है। साथ ही, व्यक्ति अनेक उपलब्धियों को हासिल करता है और आपके अधूरे कार्य भी पूरे होते हैं। 

चातुर्मास 2026 के दौरान पड़ने वाले व्रत-त्योहार 

चातुर्मास के चार माह के दौरान पड़ने वाले प्रत्येक हिंदू पर्व का अपना धार्मिक महत्व होता है जो भगवान विष्णु, शिव जी, देवी दुर्गा, श्रीगणेश संग अनेक देवी-देवताओं की कृपा प्राप्ति के लिए श्रेष्ठ समय होता है। ऐसे में, चातुर्मास 2026 में आने वाले हर पर्व एवं त्योहार का महत्व बढ़ जाता है इसलिए हम आपको नीचे चौमासा में आ रहे व्रत-त्योहारों की संपूर्ण सूची प्रदान करने जा रहे हैं।

तिथिपर्व का नाम
25 जुलाई 2026, शनिवारदेवशयनी एकादशी, आषाढ़ी एकादशी
26 जुलाई 2026, रविवारप्रदोष व्रत (शुक्ल)
29 जुलाई 2026, बुधवारगुरु-पूर्णिमा, आषाढ़ पूर्णिमा व्रत
2 अगस्त 2026, रविवारसंकष्टी चतुर्थी
9 अगस्त 2026,रविवारकामिका एकादशी
10 अगस्त 2026, सोमवारप्रदोष व्रत (कृष्ण)
11 अगस्त 2026, मंगलवारमासिक शिवरात्रि
12 अगस्त 2026, बुधवारश्रावण अमावस्या
15 अगस्त 2026, शनिवारहरियाली तीज
17 अगस्त 2026, सोमवारनाग पंचमी, सिंह संक्रांति
23 अगस्त 2026, रविवारश्रावण पुत्रदा एकादशी
25 अगस्त 2026, मंगलवारप्रदोष व्रत (शुक्ल)
26 अगस्त 2026, बुधवारओणम/थिरुवोणम
28 अगस्त 2026, शुक्रवाररक्षाबंधन, श्रावण पूर्णिमा व्रत
31 अगस्त 2026, सोमवारसंकष्टी चतुर्थी, कजरी तीज
4 सितंबर 2026, शुक्रवारजन्माष्टमी
7 सितंबर 2026, सोमवारअजा एकादशी
8 सितंबर 2026, मंगलवारप्रदोष व्रत (कृष्ण)
9 सितंबर 2026, बुधवारमासिक शिवरात्रि
11 सितंबर 2026, शुक्रवारभाद्रपद अमावस्या
14 सितंबर 2026, सोमवारगणेश चतुर्थी, हरतालिका तीज
17 सितंबर 2026, गुरुवारकन्या संक्रांति
22 सितंबर 2026, मंगलवारपरिवर्तिनी एकादशी
24 सितंबर 2026, गुरुवारप्रदोष व्रत (शुक्ल)
25 सितंबर 2026, शुक्रवारअनंत चतुर्दशी
26 सितंबर 2026, शनिवारभाद्रपद पूर्णिमा व्रत
29 सितंबर 2026, मंगलवारसंकष्टी चतुर्थी
6 अक्टूबर 2026, मंगलवारइन्दिरा एकादशी
8 अक्टूबर 2026,  गुरुवारमासिक शिवरात्रि, प्रदोष व्रत (कृष्ण)
10 अक्टूबर 2026, शनिवारअश्विन अमावस्या
11 अक्टूबर 2026, रविवारशरद नवरात्रि, घटस्थापना
16 अक्टूबर 2026, शुक्रवारकल्परम्भ
17 अक्टूबर 2026, शनिवारनवपत्रिका पूजा, तुला संक्रांति
19 अक्टूबर 2026, सोमवारदुर्गा महानवमी पूजा, दुर्गा महा अष्टमी पूज
20 अक्टूबर 2026, मंगलवारदशहरा, शरद नवरात्रि पारणा
21 अक्टूबर 2026, बुधवारदुर्गा विसर्जन
22 अक्टूबर 2026, गुरुवारपापांकुशा एकादशी
23 अक्टूबर 2026, शुक्रवारप्रदोष व्रत (शुक्ल)
26 अक्टूबर 2026, सोमवारअश्विन पूर्णिमा व्रत
29 अक्टूबर 2026, गुरुवारसंकष्टी चतुर्थी, करवा चौथ
5 नवंबर 2026, गुरुवाररमा एकादशी
6 नवंबर 2026, शुक्रवारधनतेरस, प्रदोष व्रत (कृष्ण)
7 नवंबर 2026, शनिवारमासिक शिवरात्रि
8 नवंबर 2026, रविवारदिवाली, नरक चतुर्दशी
9 नवंबर 2026, सोमवारकार्तिक अमावस्या
10 नवंबर 2026, मंगलवारगोवर्धन पूज
11 नवंबर 2026, बुधवारभाई दूज
15 नवंबर 2026, रविवारछठ पूजा
16 नवंबर 2026, सोमवारवृश्चिक संक्रांति
20 नवंबर 2026, शुक्रवारदेवुत्थान एकादशी

चातुर्मास 2026 में पड़ने वाली एकादशी 

तिथिपर्व का नाम
25 जुलाई 2026, शनिवारदेवशयनी एकादशी, अषाढ़ी एकादशी
9 अगस्त 2026,रविवारकामिका एकादशी
23 अगस्त 2026, रविवारश्रावण पुत्रदा एकादशी
7 सितंबर 2026, सोमवारअजा एकादशी
22 सितंबर 2026, मंगलवारपरिवर्तिनी एकादशी
6 अक्टूबर 2026, मंगलवारइन्दिरा एकादशी
22 अक्टूबर 2026, गुरुवारपापांकुशा एकादशी
5 नवंबर 2026, गुरुवाररमा एकादशी
20 नवंबर 2026, शुक्रवारदेवुत्थान एकादशी

क्या चातुर्मास में लगेगा खरमास? 

वर्ष 2026 के चातुर्मास के दौरान न तो अधिकमास लगेगा और न ही खरमास का प्रभाव पड़ेगा। बता दें कि अधिक मास वह महीना होता है  जो कभी-कभी पंचांग में संतुलन बनाने के लिए जोड़ा जाता है। वहीं, खरमास वह समय होता है जब सूर्य धनु और मीन राशि में प्रवेश करते हैं और इस दौरान शुभ कार्यों को करने की मनाही होती है। हालांकि, साल 2026 में अधिकमास पड़ेगा, लेकिन वह देवशयनी एकादशी से पूर्व लगकर समाप्त हो जाएगा। 

चातुर्मास में क्यों वर्जित होते हैं शुभ कार्य?

हिंदू मान्यताओं के अनुसार, आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी से भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं और उनके साथ अन्य देवी-देवता भी योगनिद्रा में होते हैं। इस समय को ही चातुर्मास का आरंभ माना जाता है। इन चार महीनों में सृष्टि के संचालन की जिम्मेदारी भगवान शिव संभालते हैं। चार महीने बाद, भगवान विष्णु कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी को योगनिद्रा से पुनः जागते हैं। इसी वजह से चातुर्मास के दौरान विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं क्योंकि इस समय देवी-देवता योगनिद्रा में होते हैं। लेकिन, इस अवधि को भक्ति, साधना और आध्यात्मिक कार्यों के लिए उत्तम माना जाता है। 

चातुर्मास का धार्मिक महत्व 

चातुर्मास 2026 का धार्मिक रूप से विशेष महत्व माना गया है। इस अवधि में भगवान की भक्ति, पूजा-पाठ और भजन-कीर्तन करना शुभ होता है। इन चार महीनों में व्रत, साधना, सेवा और तप करने से व्यक्ति को जीवन में शुभ फलों की प्राप्ति होती है। साथ ही, भगवान का आशीर्वाद भी ऐसे लोगों पर सदैव बना रहता है। चातुर्मास का समय साधु-संतों के लिए साधना और स्वाध्याय का होता है। मान्यता है कि इन चार माह के दौरान धर्म, व्रत और पुण्य कर्म करने वाले लोगों को विशेष परिणाम प्राप्त होते हैं। 

इसके अलावा, चातुर्मास में ध्यान और तप करना भी जातक के लिए कल्याणकारी माना जाता है। चातुर्मास की अवधि साधना की दृष्टि से अत्यंत महत्व रखती है इसलिए इस दौरान श्रीहरि की उपासना करें और विशेष अनुष्ठान, मंत्र जप, गीता पाठ आदि धार्मिक कार्य करने चाहिए। इन चार महीनों में अपनी क्षमता के अनुसार गरीब और जरूरतमंदों को धन, छाता, वस्त्र, ज़रूरी वस्तुओं और चप्पल आदि का दान करना चाहिए। चातुर्मास की अवधि में मनुष्य को संयमित जीवन जीना चाहिए और सुबह जल्दी उठना एवं रात को जल्दी सोना चाहिए। साथ ही, भोजन भी समय पर करना चाहिए। 

चातुर्मास 2026 में अवश्य करें ये कार्य 

  • चातुर्मास में भगवान श्रीहरि विष्णु, महादेव और अन्य देवी-देवताओं की उपासना अत्यंत फलदायी मानी जाती है। इस समय नियमित रूप से मंत्र जप, कथा-श्रवण और पूजा-पाठ करने से विशेष लाभ मिलता है। यह अवधि भगवान की कृपा प्राप्ति के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है। 
  • इस अवधि में घर या मंदिर में हवन-पूजन जैसे धार्मिक कार्य करने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है। 
  • हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, चातुर्मास अर्थात चार महीनों की अवधि में तीर्थ स्थलों की यात्रा और पवित्र नदियों में स्नान करना बहुत शुभ एवं पुण्यदायी होता है। ऐसा करने से मनुष्य के पापों का नाश होता है और आत्मा की शुद्धि होती है।
  • चातुर्मास के दौरान धार्मिक ग्रंथ जैसे भगवद्गीता, भागवत पुराण,  रामायण आदि का पाठ करना अत्यधिक लाभकारी साबित होता है। जो जातक सच्चे मन से इनका पाठ करता है, उसके मन की एकाग्रता बढ़ती है और जीवन को सही दिशा का ज्ञान होता है। 
  • इस समय आप अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंदों और गरीबों को अन्न, दवाइयां, वस्त्र या धन का दान लाभदायक माना जाता है, विशेष रूप से भोजन कराना या अनाज दान करना फलदायी होता है। 
  • चातुर्मास में आत्म-शुद्धि और मानसिक शांति की प्राप्ति के लिए नियमित रूप से ध्यान और प्राणायाम करें। इससे व्यक्ति का मन स्थिर रहता है और आत्मिक जागरूकता भी बढ़ती है। 
  • चातुर्मास के चार महीनों की अवधि में पीपल, तुलसी, आंवला जैसे धार्मिक और औषधीय पौधे लगाने से आपको अपार पुण्य प्राप्त होता है। साथ ही, पौधे लगाने से पर्यावरण के साथ-साथ आध्यात्मिक उन्नति भी मिलती है।

चातुर्मास के दौरान भूलकर भी न करें ये काम 

  • चातुर्मास के दौरान दही, मूली, बैंगन और साग आदि सब्जियों का सेवन वर्जित माना जाता है इसलिए इनके सेवन से बचें।
  • इस दौरान झूठ, छल, कपट और नशे जैसी बुरी आदतों से दूरी बनाकर रखें। 
  • इस अवधि में कोई भी शुभ एवं मांगलिक कार्य या फिर नया कार्य न करें। 
  • अगर आप चातुर्मास के चार माह में व्रत या साधना कर रहे हैं, तो इस दौरान आपको यात्रा करने से बचना चाहिए। 

चातुर्मास के दौरान इन बातों का रखें ध्यान 

  • चातुर्मास के दौरान विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश, नए व्यापार का आरंभ जैसे शुभ कार्य करने से बचना चाहिए क्योंकि ऐसा माना जाता है कि इस समय भगवान विष्णु के योगनिद्रा में होने की वजह से मांगलिक कार्य फलदायी नहीं होते हैं।
  • इस समय व्यक्ति को अपनी इंद्रियों पर संयम रखना चाहिए। साथ ही, आपको आचरण, वाणी, और सोच को भी पवित्र और विनम्रता बनाए रखने की सलाह दी जाती है। आप लालच, गुस्से, और मोह जैसे अवगुणों को त्याग दें। 
  • चौमासा में प्याज, लहसुन, मांस-मदिरा और मसालेदार भोजन के सेवन से आपको बचना चाहिए। बता दें कि इस दौरान कुछ लोग पत्तेदार सब्जियां और दही का भी त्याग कर देते हैं। 
  • इन चार महीनों की अवधि में कुछ भक्त भोजन या फलाहार केवल एक समय ही करते हैं। ऐसा करने से जातक में आत्मसंयम बढ़ता है और मन शुद्ध भी होता है।
  • इस समय व्यक्ति को भोग-विलास, फिजूलखर्ची या प्रदर्शन से बचना चाहिए, बल्कि जितना हो सके, उतना आपको अपनी जीवनशैली को सादा और शुद्ध बनाए रखने का प्रयास करना चाहिए।
  • यदि आप किसी गुरु या आध्यात्मिक शिक्षक के शिष्य हैं, तो इस दौरान उनसे मार्गदर्शन प्राप्त करें। यह समय आत्मिक रूप से जुड़ने का होता है।

चातुर्मास के दौरान करें इन नियमों का पालन  

  • संभव हो, तो चातुर्मास के दौरान व्यक्ति को व्रत अवश्य करना चाहिए। 
  • इस दौरान भूमि पर बिस्तर लगाकर सोना चाहिए।
  • इन चार महीनों में सूर्योदय से पूर्व उठने का प्रयास करें। 
  • ज्यादा से ज्यादा मौन रहें।

चातुर्मास के दौरान जरूर करें ये 3 उपाय 

तुलसी पर दीपक जलाएं: चातुर्मास के दौरान नियमित रूप से तुलसी की पूजा और सेवा करने से घर-परिवार में सुख-समृद्धि का वास रहता है। साथ ही, नकारात्मक ऊर्जा का भी नाश होता है। इन चार माह के दौरान प्रतिदिन सुबह स्नान के पश्चात तुलसी को जल अर्पित करें और शाम के समय उसके सामने दीपक जलाएं। 

हनुमान चालीसा का पाठ: चातुर्मास के चार महा के दौरान रात को सोते समय हनुमान चालीसा का पाठ करना शुभ माना गया है। बजरंगबली की पूजा करने से आपके जीवन से सभी समस्याओं और  बुरी शक्तियों का अंत हो जाता है।

भगवान शिव का पूजन: चातुर्मास में भगवान विष्णु योगनिद्रा में होते हैं, परंतु इस दौरान सृष्टि का कार्यभार भगवान शिव संभालते हैं। ऐसे में, इस समय भगवान शिव की पूजा-अर्चना के साथ-साथ रुद्राभिषेक करना भी फलदायी साबित होता है। इनकी पूजा और अभिषेक से कुंडली में मंगल और शनि जैसे ग्रहों का नकारात्मक प्रभाव कम होता है। 

हम उम्मीद करते हैं कि आपको हमारा यह ब्लॉग ज़रूर पसंद आया होगा। अगर ऐसा है तो आप इसे अपने अन्य शुभचिंतकों के साथ ज़रूर साझा करें। धन्यवाद!

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. साल 2026 में चातुर्मास कब से शुरू है?

इस वर्ष में चातुर्मास का आरंभ 25 जुलाई 2026 से होने जा रहा है। 

2. किस एकादशी से भगवान विष्णु का शयन काल शुरू होता है?

हिंदू धर्म में आषाढ़ मास शुक्ल पक्ष की एकादशी से भगवान विष्णु योगनिद्रा में प्रवेश करते हैं। 

3. भगवान विष्णु योगनिद्रा से कब जागते हैं ?

कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी अर्थात देवउठनी एकादशी को विष्णु जी योगनिद्रा से पुनः जागते हैं। 

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