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गणेश चतुर्थी 2026: 13 या 14 सितंबर? जानिए सही तारीख, शुभ मुहूर्त, स्थापना विधि और विसर्जन

Om Asttro Universe Team



 गणेश चतुर्थी 2026: 13 या 14 सितंबर? जानिए सही तारीख, शुभ मुहूर्त, स्थापना विधि और विसर्जन

OMASTTRO UNIVERSE प्रस्तुत करता है — सनातन धर्म, ज्योतिष, पर्व-त्योहार और धार्मिक परंपराओं से जुड़ी विशेष जानकारी।

🔱 ॐ गं गणपतये नमः | गणपति बप्पा मोरया! 🙏

गणेश चतुर्थी हिंदू धर्म के सबसे प्रमुख और लोकप्रिय पर्वों में से एक है। यह दिन भगवान गणेश के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाया जाता है। मान्यता है कि भगवान गणेश विघ्नों को दूर करने वाले, बुद्धि-विवेक प्रदान करने वाले और शुभ कार्यों के प्रथम पूज्य देवता हैं।

हर वर्ष भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश चतुर्थी मनाई जाती है। लेकिन 2026 में गणेश चतुर्थी की तारीख को लेकर 13 और 14 सितंबर का भ्रम बना हुआ है।

तो आखिर गणेश चतुर्थी 2026 कब है—13 या 14 सितंबर?

आइए जानते हैं सही तारीख, चतुर्थी तिथि, गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, पूजा सामग्री और गणेश विसर्जन की महत्वपूर्ण जानकारी।

🌺 गणेश चतुर्थी 2026 कब है?

गणेश चतुर्थी 2026 सोमवार, 14 सितंबर को मनाई जाएगी।

पंचांग के अनुसार भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 14 सितंबर 2026 को सुबह 7:06 बजे प्रारंभ होकर 15 सितंबर 2026 को सुबह 7:44 बजे तक रहेगी।

इसी कारण मुख्य गणेश चतुर्थी और गणपति स्थापना 14 सितंबर को की जाएगी।

📅 गणेश चतुर्थी 2026 की मुख्य जानकारी

  • गणेश चतुर्थी: 14 सितंबर 2026, सोमवार
  • चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 14 सितंबर, सुबह 7:06 बजे
  • चतुर्थी तिथि समाप्त: 15 सितंबर, सुबह 7:44 बजे
  • गणपति स्थापना एवं पूजा: 14 सितंबर
  • गणेश विसर्जन: 25 सितंबर 2026, अनंत चतुर्दशी
  • गणेशोत्सव: लगभग 10 दिनों तक

2026 में अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर को होगी, जिसे गणेशोत्सव के समापन और प्रमुख गणेश विसर्जन दिवस के रूप में माना जाता है।

❓ 13 या 14 सितंबर—आखिर सही तारीख कौन सी है?

यह सवाल इस वर्ष बहुत से लोगों के मन में है।

दरअसल, अलग-अलग शहरों के पंचांग में तिथि के प्रारंभ और समाप्त होने के समय के कारण तारीख को लेकर भ्रम दिखाई दे सकता है। कुछ स्थानों के संदर्भ में चतुर्थी तिथि 13 सितंबर की शाम से जुड़ी दिखाई देती है।

लेकिन 2026 में गणेश चतुर्थी का मुख्य पर्व 14 सितंबर, सोमवार को ही मनाया जाएगा।

इस दिन चतुर्थी तिथि के दौरान भगवान गणेश की स्थापना और मध्याह्न काल में पूजा का शुभ समय प्राप्त हो रहा है।

इसलिए भक्तों को 14 सितंबर 2026 को गणपति स्थापना और गणेश चतुर्थी की पूजा करनी चाहिए।

🕉️ गणेश चतुर्थी 2026 शुभ मुहूर्त

गणेशजी की पूजा में मध्याह्न काल का विशेष महत्व माना जाता है।

🌟 गणपति स्थापना एवं पूजा मुहूर्त

📅 तारीख: 14 सितंबर 2026, सोमवार
⏰ शुभ मुहूर्त: सुबह 11:08 बजे से दोपहर 1:36 बजे तक
⏱️ अवधि: लगभग 2 घंटे 28 मिनट

यह समय गणपति स्थापना और मुख्य पूजा के लिए विशेष रूप से उपयोगी है।

नोट: पूजा मुहूर्त शहर के अनुसार कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है। इसलिए अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार अंतिम समय अवश्य देख लें।

🌙 गणेश चतुर्थी पर चंद्रमा देखने से क्यों बचना चाहिए?

गणेश चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन से बचने की परंपरा है।

पौराणिक मान्यता के अनुसार गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा को देखने से व्यक्ति पर झूठा कलंक या मिथ्या आरोप लगने का दोष लग सकता है। इसी कारण इस दिन विशेष समय में चंद्रमा देखने से बचने की सलाह दी जाती है।

इंदौर के पंचांग के अनुसार 14 सितंबर को चंद्र दर्शन से बचने का समय लगभग सुबह 9:03 बजे से रात 8:19 बजे तक बताया गया है।

🪔 घर में गणपति स्थापना कैसे करें?

गणपति स्थापना केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि घर में शुभ ऊर्जा और सकारात्मक भाव स्थापित करने का अवसर भी माना जाता है।

गणपति स्थापना की सरल विधि

1. घर की सफाई करें
गणपति स्थापना से पहले पूजा स्थल और पूरे घर की अच्छी तरह सफाई करें।

2. पूजा स्थान तैयार करें
एक साफ चौकी पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाएं।

3. भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित करें
गणेशजी की प्रतिमा को चौकी पर श्रद्धापूर्वक स्थापित करें।

4. कलश स्थापना करें
गणेशजी के पास कलश स्थापित कर उसमें जल, अक्षत और आवश्यक पूजन सामग्री रखें।

5. गणेशजी का आवाहन करें
भगवान गणेश का ध्यान करते हुए उनका आवाहन करें।

6. पंचोपचार या षोडशोपचार पूजा करें
गंध, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य आदि अर्पित करें।

7. दूर्वा और मोदक चढ़ाएं
गणेशजी को दूर्वा और मोदक अर्पित करना विशेष शुभ माना जाता है।

8. गणेश मंत्र का जाप करें

📿 गणेश मंत्र

ॐ गं गणपतये नमः।

इसके बाद गणेशजी की आरती करें और परिवार की सुख-समृद्धि तथा विघ्नों के निवारण की प्रार्थना करें।

🌿 गणेश पूजा सामग्री List

गणपति स्थापना के लिए आप अपनी परंपरा के अनुसार निम्न सामग्री रख सकते हैं:

  • गणेशजी की प्रतिमा
  • चौकी
  • लाल या पीला वस्त्र
  • कलश
  • रोली और कुमकुम
  • अक्षत
  • फूल
  • दूर्वा
  • धूप
  • दीपक
  • कपूर
  • पंचामृत
  • फल
  • नारियल
  • सुपारी
  • पान
  • मोदक या अन्य सात्त्विक भोग
  • जल
  • मौली/कलावा

पूजा सामग्री में क्षेत्र और परिवार की परंपरा के अनुसार अंतर हो सकता है।

🍥 गणेशजी को मोदक क्यों प्रिय हैं?

मोदक को भगवान गणेश का प्रिय भोग माना जाता है।

मोदक को ज्ञान, आनंद और आध्यात्मिक मिठास का प्रतीक भी माना जाता है। गणेशजी को मोदक अर्पित करने की परंपरा के पीछे अनेक पौराणिक मान्यताएं प्रचलित हैं।

इसीलिए गणेश चतुर्थी पर मोदक का भोग विशेष रूप से लगाया जाता है।

🌿 गणेशजी को दूर्वा क्यों चढ़ाई जाती है?

भगवान गणेश की पूजा में दूर्वा का विशेष महत्व है।

मान्यता है कि दूर्वा गणेशजी को अत्यंत प्रिय है और इसे अर्पित करने से भगवान गणेश प्रसन्न होते हैं।

गणेश पूजा में दूर्वा अर्पित करते समय श्रद्धा और शुद्ध भाव को सबसे महत्वपूर्ण माना गया है।

🔱 गणेश चतुर्थी का धार्मिक महत्व

भगवान गणेश को विघ्नहर्ता, बुद्धि के देवता और प्रथम पूज्य माना जाता है।

किसी भी शुभ कार्य से पहले गणेशजी की पूजा करने की परंपरा इसलिए है क्योंकि भक्त उनसे अपने कार्यों में आने वाली बाधाओं को दूर करने और सफलता प्रदान करने की प्रार्थना करते हैं।

गणेश चतुर्थी के अवसर पर गणेशजी की आराधना करने से भक्त:

  • बुद्धि और विवेक की प्रार्थना करते हैं
  • कार्यों में सफलता की कामना करते हैं
  • बाधाओं से मुक्ति की प्रार्थना करते हैं
  • सुख-समृद्धि की कामना करते हैं
  • परिवार में शुभता और सकारात्मकता के लिए पूजा करते हैं

🏠 गणपति स्थापना के समय इन बातों का रखें ध्यान

गणेशजी की स्थापना करते समय कुछ सामान्य बातों का ध्यान रखना शुभ माना जाता है:

✅ पूजा स्थान स्वच्छ रखें।
✅ सात्त्विक वातावरण बनाए रखें।
✅ गणेशजी को श्रद्धापूर्वक भोग लगाएं।
✅ नियमित रूप से आरती और पूजा करें।
✅ पूजा के दौरान गणेश मंत्र का जाप करें।
✅ विसर्जन के समय पर्यावरण का ध्यान रखें।

धार्मिक नियमों में क्षेत्र और परिवार की परंपरा के अनुसार भिन्नता हो सकती है।

🌊 गणेश विसर्जन 2026 कब होगा?

गणेश चतुर्थी के बाद अलग-अलग परिवार अपनी परंपरा के अनुसार डेढ़ दिन, तीसरे, पांचवें, सातवें या दसवें/ग्यारहवें दिन गणेश विसर्जन करते हैं।

2026 में अनंत चतुर्दशी शुक्रवार, 25 सितंबर को होगी और यह गणेशोत्सव के प्रमुख समापन दिवस के रूप में मनाई जाएगी।

गणपति विसर्जन के समय भक्त भगवान गणेश से अगले वर्ष पुनः आने की प्रार्थना करते हुए कहते हैं—

🙏 “गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ!”

♻️ पर्यावरण-अनुकूल गणेश विसर्जन

आज के समय में गणेशोत्सव मनाते हुए पर्यावरण की रक्षा करना भी हमारी जिम्मेदारी है।

संभव हो तो:

  • मिट्टी की गणेश प्रतिमा का प्रयोग करें।
  • प्राकृतिक रंगों वाली प्रतिमा चुनें।
  • स्थानीय प्रशासन द्वारा बनाए गए विसर्जन कुंड का उपयोग करें।
  • प्लास्टिक और प्रदूषण से बचें।
  • पूजा सामग्री को जल स्रोतों में न डालें।

भक्ति के साथ प्रकृति की रक्षा करना भी गणेशजी की सच्ची सेवा है।

✨ गणेश चतुर्थी 2026 पर विशेष प्रार्थना

गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश के सामने बैठकर शांत मन से प्रार्थना करें:

“हे विघ्नहर्ता श्री गणेश, हमारे जीवन के सभी विघ्न और बाधाएं दूर करें। हमें बुद्धि, विवेक, स्वास्थ्य, सुख, शांति और समृद्धि प्रदान करें। हमारे परिवार पर अपनी कृपा बनाए रखें।”

📌 Ganesh Chaturthi 2026: Quick Facts

विषयजानकारी
गणेश चतुर्थी14 सितंबर 2026, सोमवार
चतुर्थी तिथि प्रारंभ14 सितंबर, सुबह 7:06 बजे
चतुर्थी तिथि समाप्त15 सितंबर, सुबह 7:44 बजे
इंदौर स्थापना/पूजा मुहूर्त11:08 AM – 1:36 PM
गणेशोत्सव समापन25 सितंबर 2026
अनंत चतुर्दशी25 सितंबर 2026, शुक्रवार
मुख्य देवताभगवान श्री गणेश

समय शहर के अनुसार बदल सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग से मिलान करना उचित है।

🙏 निष्कर्ष

गणेश चतुर्थी 2026 का मुख्य पर्व 14 सितंबर, सोमवार को मनाया जाएगा। 13 सितंबर को लेकर भ्रम इसलिए है क्योंकि चतुर्थी तिथि की गणना और विभिन्न स्थानों के पंचांग में तिथि प्रारंभ का समय अलग दिखाई दे सकता है। लेकिन 14 सितंबर को गणेश स्थापना और पूजा के लिए उपयुक्त चतुर्थी तथा मध्याह्न काल उपलब्ध है।

इस गणेश चतुर्थी भगवान गणेश को अपने घर आमंत्रित करें, श्रद्धा से पूजा करें और उनसे जीवन के सभी विघ्नों को दूर करने की प्रार्थना करें।

🌺 गणपति बप्पा मोरया!

🔱 मंगल मूर्ति मोरया!

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ॐ गं गणपतये नमः।

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