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विश्वकर्मा पूजा 2026: जानिए सही तारीख, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, महत्व और भगवान विश्वकर्मा की कथा

Om Asttro Universe Team



विश्वकर्मा पूजा 2026: जानिए सही तारीख, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, महत्व और भगवान विश्वकर्मा की कथा

OMASTTRO UNIVERSE प्रस्तुत करता है — सनातन धर्म, ज्योतिष, पर्व-त्योहार और धार्मिक परंपराओं से जुड़ी विशेष जानकारी।

🔱 ॐ विश्वकर्मणे नमः।

भारत में भगवान विश्वकर्मा को सृष्टि के दिव्य वास्तुकार, शिल्पकार और निर्माण-कला के अधिष्ठाता देवता के रूप में पूजा जाता है। हर वर्ष विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर कारखानों, वर्कशॉप, दुकानों, कार्यालयों और निर्माण स्थलों पर मशीनों, औजारों एवं कार्य से जुड़े उपकरणों की पूजा की जाती है।

साल 2026 में विश्वकर्मा पूजा 17 सितंबर, गुरुवार को मनाई जाएगी। यह दिन कन्या संक्रांति के साथ जुड़ा हुआ है। पंचांग गणना के अनुसार कन्या संक्रांति का क्षण 17 सितंबर को लगभग सुबह 7:58 बजे है।

आइए जानते हैं विश्वकर्मा पूजा 2026 की तारीख, शुभ समय, पूजा विधि, महत्व, मंत्र और भगवान विश्वकर्मा से जुड़ी पौराणिक मान्यताओं के बारे में।

विश्वकर्मा पूजा 2026 कब है?

विश्वकर्मा पूजा 2026 — 17 सितंबर 2026, गुरुवार को मनाई जाएगी।

विश्वकर्मा पूजा को कई स्थानों पर विश्वकर्मा जयंती के नाम से भी जाना जाता है। यह पर्व विशेष रूप से कारीगरों, इंजीनियरों, वास्तु एवं निर्माण क्षेत्र से जुड़े लोगों, मशीनरी उद्योग, फैक्ट्रियों, वर्कशॉप और व्यापारिक प्रतिष्ठानों में विशेष श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।

विश्वकर्मा पूजा 2026 की मुख्य जानकारी

  • पर्व: विश्वकर्मा पूजा / विश्वकर्मा जयंती
  • तारीख: 17 सितंबर 2026
  • दिन: गुरुवार
  • अवसर: कन्या संक्रांति
  • कन्या संक्रांति का क्षण: लगभग सुबह 7:58 बजे
  • आराध्य देव: भगवान विश्वकर्मा
  • मुख्य पूजा: मशीन, औजार, वाहन, उपकरण एवं कार्यस्थल की पूजा

नोट: पूजा का स्थानीय शुभ समय शहर और पंचांग के अनुसार अलग हो सकता है। इसलिए अपने क्षेत्र के स्थानीय पंचांग के अनुसार अंतिम मुहूर्त अवश्य देखें।

भगवान विश्वकर्मा कौन हैं?

सनातन परंपरा में भगवान विश्वकर्मा को दिव्य शिल्पकार और वास्तुकार माना जाता है। उन्हें निर्माण, वास्तुकला, शिल्प, यंत्र और तकनीकी कौशल से जुड़ा अधिष्ठाता देवता माना जाता है।

पौराणिक मान्यताओं में भगवान विश्वकर्मा द्वारा देवताओं के लिए अनेक दिव्य भवनों, नगरों और अस्त्र-शस्त्रों के निर्माण का वर्णन मिलता है। विभिन्न धार्मिक परंपराओं में उन्हें द्वारका, इंद्रप्रस्थ, स्वर्ण लंका और देवताओं के दिव्य लोकों के निर्माण से भी जोड़ा जाता है।

इसी कारण कारीगर और तकनीकी कार्यों से जुड़े लोग भगवान विश्वकर्मा को अपना आराध्य मानते हैं।

विश्वकर्मा पूजा का महत्व

विश्वकर्मा पूजा केवल एक धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि यह श्रम, कौशल, तकनीक और सृजन के प्रति सम्मान व्यक्त करने का अवसर भी है।

इस दिन लोग अपने कार्य में उपयोग होने वाले औजारों और मशीनों को भगवान विश्वकर्मा का स्वरूप मानकर उनकी पूजा करते हैं।

मान्यता है कि भगवान विश्वकर्मा की पूजा करने से:

  • कार्यक्षेत्र में सकारात्मकता आती है।
  • मशीनरी और उपकरणों के प्रति सम्मान की भावना बढ़ती है।
  • व्यापार एवं कार्य में उन्नति की कामना की जाती है।
  • तकनीकी और रचनात्मक कार्यों में सफलता के लिए प्रार्थना की जाती है।
  • कर्म के प्रति निष्ठा और समर्पण की भावना मजबूत होती है।

विश्वकर्मा पूजा 2026 की पूजा विधि

विश्वकर्मा पूजा के दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद कार्यस्थल और मशीनों की अच्छी तरह सफाई करें।

पूजा की सरल विधि

1. कार्यस्थल की सफाई करें
सबसे पहले दुकान, फैक्ट्री, वर्कशॉप या कार्यालय की साफ-सफाई करें।

2. मशीन और औजारों को व्यवस्थित करें
जिन उपकरणों से आपका काम चलता है, उन्हें साफ करके पूजा के लिए रखें।

3. भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें
स्वच्छ स्थान पर भगवान विश्वकर्मा की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें।

4. दीपक और धूप जलाएं
भगवान विश्वकर्मा का ध्यान करके दीपक और धूप अर्पित करें।

5. कलश एवं पूजा सामग्री रखें
आवश्यकतानुसार कलश, अक्षत, पुष्प, रोली, चंदन और प्रसाद रखें।

6. भगवान विश्वकर्मा का पूजन करें
रोली, अक्षत, फूल, फल और मिठाई अर्पित करें।

7. मशीन एवं औजारों की पूजा करें
अपने कार्य में इस्तेमाल होने वाली मशीन, औजार, वाहन या उपकरणों पर तिलक लगाएं और पुष्प अर्पित करें।

8. मंत्र का जाप करें
श्रद्धा के साथ भगवान विश्वकर्मा के मंत्र का जाप करें।

9. आरती करें
अंत में भगवान विश्वकर्मा की आरती करके प्रसाद वितरित करें।

भगवान विश्वकर्मा का मंत्र

पूजा के दौरान श्रद्धा के साथ इस सरल मंत्र का जाप किया जा सकता है:

ॐ विश्वकर्मणे नमः।

इस मंत्र का जाप करते हुए भगवान विश्वकर्मा से अपने कार्य, व्यापार, कौशल और कार्यस्थल की उन्नति की प्रार्थना करें।

विश्वकर्मा पूजा में किन चीजों की पूजा की जाती है?

विश्वकर्मा पूजा में कार्य के अनुसार अलग-अलग उपकरणों और साधनों की पूजा की जाती है।

जैसे:

  • मशीनरी
  • औद्योगिक उपकरण
  • औजार
  • वाहन
  • कंप्यूटर एवं तकनीकी उपकरण
  • निर्माण सामग्री
  • इलेक्ट्रॉनिक उपकरण
  • वर्कशॉप के उपकरण
  • दुकान एवं व्यापार से जुड़े साधन

इसका मूल भाव यही है कि जिस साधन से व्यक्ति अपना कर्म और आजीविका चलाता है, उसका सम्मान किया जाए।

विश्वकर्मा पूजा में क्या सावधानियां रखें?

पूजा के साथ-साथ सुरक्षा का ध्यान रखना भी जरूरी है।

  • मशीनों की पूजा करते समय उनकी बिजली आपूर्ति सुरक्षित तरीके से बंद रखें।
  • मशीनों पर तेल, घी या अन्य ज्वलनशील सामग्री न डालें।
  • पूजा के बाद उपकरणों को सही तरीके से व्यवस्थित करें।
  • कार्यस्थल पर अग्नि सुरक्षा का ध्यान रखें।
  • पूजा के नाम पर मशीनों के सुरक्षा उपकरणों को हटाने से बचें।

धर्म के साथ सुरक्षा भी जरूरी है।

विश्वकर्मा पूजा और कन्या संक्रांति का संबंध

विश्वकर्मा पूजा का संबंध कन्या संक्रांति से माना जाता है। 2026 में सूर्य का कन्या राशि में प्रवेश 17 सितंबर को हो रहा है और इसी अवसर पर विश्वकर्मा पूजा मनाई जाएगी।

संक्रांति का सनातन परंपरा में विशेष महत्व माना गया है और इस अवसर पर दान-पुण्य एवं धार्मिक कार्य किए जाते हैं।

किन लोगों के लिए विश्वकर्मा पूजा विशेष है?

विश्वकर्मा पूजा विशेष रूप से उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है जिनका कार्य निर्माण, तकनीक, मशीनरी या शिल्प से जुड़ा है।

उदाहरण के लिए:

  • इंजीनियर
  • आर्किटेक्ट
  • मैकेनिक
  • इलेक्ट्रिशियन
  • बढ़ई
  • लोहार
  • कारीगर
  • मशीन ऑपरेटर
  • फैक्ट्री कर्मचारी
  • वाहन व्यवसाय से जुड़े लोग
  • निर्माण क्षेत्र से जुड़े लोग
  • तकनीकी एवं औद्योगिक संस्थान
  • दुकानदार और व्यापारी

हालांकि भगवान विश्वकर्मा की पूजा कोई भी व्यक्ति श्रद्धा और अपनी परंपरा के अनुसार कर सकता है।

विश्वकर्मा पूजा का संदेश

विश्वकर्मा पूजा हमें केवल मशीनों और औजारों की पूजा करना नहीं सिखाती, बल्कि यह याद दिलाती है कि कौशल, मेहनत और सृजन की शक्ति का सम्मान करना भी हमारी संस्कृति का हिस्सा है।

हमारे हाथों में मौजूद हुनर और उसे पूरा करने वाले साधन दोनों ही जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए विश्वकर्मा पूजा पर अपने काम, अपने कौशल और अपने कर्म के प्रति सम्मान व्यक्त करना इस पर्व का सुंदर संदेश है।

निष्कर्ष

विश्वकर्मा पूजा 2026, 17 सितंबर गुरुवार को मनाई जाएगी। यह दिन भगवान विश्वकर्मा की पूजा के साथ-साथ अपने कार्य, कौशल, मशीनरी और कर्म के प्रति सम्मान व्यक्त करने का अवसर है।

इस दिन अपने कार्यस्थल की स्वच्छता, मशीनों और औजारों की पूजा तथा भगवान विश्वकर्मा से कार्य में सफलता और उन्नति की प्रार्थना करें।

भगवान विश्वकर्मा सभी के जीवन में कौशल, सफलता, समृद्धि और रचनात्मक ऊर्जा प्रदान करें।

🔱 ॐ विश्वकर्मणे नमः।

जय भगवान विश्वकर्मा। 🙏

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