🔱
OM ASTTRO UNIVERSE
Om Trivedi / Kanishk Trivedi
Join Our Official WhatsApp Channel
🔮 Vedic Astrology • 🔱 Tantra • 📜 Ravan Samhita • 🎙️ Podcast • 🕉️ Sanatan Mysteries
◉ OFFICIAL CHANNEL JOIN NOW →

करवा चौथ 2026 की तैयारी: सरगी, सोलह श्रृंगार, पूजा सामग्री और नियम

Om Asttro Universe Team

 


करवा चौथ 2026 की तैयारी: सरगी, सोलह श्रृंगार, पूजा सामग्री और नियम

OMASTTRO UNIVERSE | सनातन धर्म, ज्योतिष एवं धार्मिक परंपराएँ

करवा चौथ हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण और लोकप्रिय पर्व है, जिसे विशेष रूप से विवाहित महिलाएँ अपने पति की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और वैवाहिक जीवन की खुशहाली की कामना के साथ मनाती हैं। इस दिन महिलाएँ सूर्योदय से चंद्रोदय तक व्रत रखती हैं, माता पार्वती, भगवान शिव, भगवान गणेश और चंद्रदेव की पूजा करती हैं तथा चंद्र दर्शन के बाद व्रत का पारण करती हैं।

करवा चौथ केवल उपवास का पर्व नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास, समर्पण और पारिवारिक परंपराओं का भी प्रतीक है। इस दिन सरगी खाने से लेकर सोलह श्रृंगार करने, पूजा की थाली सजाने और चंद्रमा को अर्घ्य देने तक हर रस्म का अपना विशेष महत्व है।

यदि आप भी करवा चौथ 2026 की तैयारी कर रही हैं, तो इस लेख में जानिए व्रत की तारीख, सरगी में क्या खाएँ, सोलह श्रृंगार की सूची, पूजा सामग्री, पूजा-विधि और व्रत के जरूरी नियम।

करवा चौथ 2026 कब है?

साल 2026 में करवा चौथ का पर्व गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 को मनाया जाएगा। यह व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है। अमांत पंचांग में इसी अवधि को आश्विन कृष्ण चतुर्थी कहा जाता है।

नई दिल्ली के लिए प्रकाशित पंचांग के अनुसार, इस दिन पूजा का समय शाम 5:38 बजे से 6:56 बजे तक है और चंद्रोदय लगभग रात 8:17 बजे बताया गया है। ये समय स्थान के अनुसार बदल सकते हैं, इसलिए अपने शहर का स्थानीय पंचांग अवश्य देखें।

करवा चौथ 2026 की मुख्य जानकारी:

  • पर्व: करवा चौथ
  • तारीख: 29 अक्टूबर 2026, गुरुवार
  • पूजा का समय: लगभग शाम 5:38 से 6:56 बजे तक (नई दिल्ली)
  • चंद्रोदय: लगभग रात 8:17 बजे (नई दिल्ली)
  • व्रत पारण: चंद्र दर्शन और अर्घ्य देने के बाद, अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार

1. करवा चौथ की सरगी क्या होती है?

सरगी करवा चौथ की एक महत्वपूर्ण परंपरा है। इसमें सास अपनी बहू को प्रातःकाल व्रत शुरू होने से पहले खाने के लिए भोजन, फल, मिठाई और अन्य सामग्री देती हैं। कई परिवारों में विवाहित महिलाएँ अपनी सास या परिवार की बड़ी महिलाओं से सरगी प्राप्त करती हैं।

सरगी का उद्देश्य दिनभर के व्रत से पहले शरीर को ऊर्जा देने वाला भोजन करना है। परिवारों और क्षेत्रों के अनुसार इसकी सामग्री में अंतर हो सकता है।

सरगी में क्या-क्या शामिल करें?

सरगी की थाली में अपनी पसंद और स्वास्थ्य के अनुसार ये चीजें रखी जा सकती हैं:

  • ताजे फल, जैसे केला, सेब और अनार
  • सूखे मेवे, जैसे बादाम, काजू और किशमिश
  • दूध, दही या अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थ
  • नारियल या नारियल पानी
  • हल्की मिठाई या खीर
  • रोटी, पराठा या अन्य पेट भरने वाला भोजन
  • पर्याप्त पानी, यदि आपकी व्रत परंपरा में सूर्योदय से पहले पानी पीने की अनुमति है

सरगी कब खानी चाहिए?

परंपरागत रूप से सरगी सूर्योदय से पहले खाई जाती है। इसके बाद व्रत शुरू किया जाता है। सरगी के लिए कोई एक सार्वभौमिक समय नहीं है; अपने स्थानीय सूर्योदय और पारिवारिक परंपरा के अनुसार समय तय करें।

सरगी के लिए उपयोगी सुझाव: केवल मिठाई या तली हुई चीजें खाने के बजाय संतुलित भोजन करें। पर्याप्त पानी पिएँ, यदि आपके व्रत के नियम इसकी अनुमति देते हैं, और बहुत अधिक नमकीन भोजन से बचें, क्योंकि इससे प्यास बढ़ सकती है।

2. करवा चौथ पर सोलह श्रृंगार का महत्व

करवा चौथ पर सोलह श्रृंगार करना कई महिलाओं के लिए विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखता है। लाल, गुलाबी या अन्य शुभ रंगों के वस्त्र पहनना, मेहंदी लगाना, चूड़ियाँ पहनना और मांग में सिंदूर सजाना इस पर्व की सुंदर परंपराओं में शामिल हैं।

सोलह श्रृंगार की सूची परिवार, क्षेत्र और परंपरा के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। प्रचलित श्रृंगार में निम्नलिखित चीजें शामिल हैं:

  1. सिंदूर — सुहाग का पारंपरिक प्रतीक।
  2. मांग टीका — माथे की शोभा बढ़ाने वाला आभूषण।
  3. बिंदी — माथे पर सजाया जाने वाला शुभ चिह्न।
  4. काजल — आँखों का श्रृंगार।
  5. नथ — नाक का पारंपरिक आभूषण।
  6. कर्णफूल या झुमके — कानों का आभूषण।
  7. मंगलसूत्र — वैवाहिक परंपरा से जुड़ा आभूषण।
  8. हार — गले का श्रृंगार।
  9. चूड़ियाँ — हाथों की पारंपरिक सजावट।
  10. मेहंदी — हाथों और पैरों पर लगाई जाने वाली सजावटी कला।
  11. बाजूबंद — बाजू का आभूषण।
  12. अंगूठी — उँगलियों का श्रृंगार।
  13. कमरबंद — कमर का पारंपरिक आभूषण।
  14. पायल — पैरों का आभूषण।
  15. बिछिया — विवाहित महिलाओं द्वारा पहना जाने वाला पारंपरिक आभूषण।
  16. इत्र या सुगंध — श्रृंगार को पूर्ण करने वाली सुगंध।

कुछ परंपराओं में वस्त्र, गजरा या अन्य सौंदर्य प्रसाधन भी सोलह श्रृंगार का हिस्सा माने जाते हैं। इसलिए इस सूची को क्षेत्रीय परंपराओं के अनुसार अपनाया जा सकता है।

करवा चौथ पर किस रंग के कपड़े पहनें?

करवा चौथ पर लाल, मैरून, गुलाबी, नारंगी और अन्य शुभ माने जाने वाले रंगों के कपड़े पहनने की परंपरा है। कई महिलाएँ अपनी शादी की साड़ी या लहंगा भी पहनती हैं।

हालाँकि, किसी एक रंग को पहनना अनिवार्य नहीं है। आप अपनी पसंद, सुविधा और पारिवारिक रीति के अनुसार वस्त्र चुन सकती हैं।

3. करवा चौथ 2026 की पूजा सामग्री सूची

करवा चौथ की पूजा से पहले सभी जरूरी सामग्री एक जगह रख लेना अच्छा रहता है, ताकि शाम के समय कोई वस्तु ढूँढ़नी न पड़े।

पूजा सामग्री चेकलिस्ट

  • माता पार्वती, भगवान शिव और भगवान गणेश की तस्वीर या प्रतिमा
  • करवा या मिट्टी का कलश
  • पूजा की थाली
  • जल और अर्घ्य देने के लिए लोटा
  • दीपक, रुई और घी या तेल
  • रोली, कुमकुम और हल्दी
  • अक्षत यानी साबुत चावल
  • फूल और फूलों की माला
  • धूप या अगरबत्ती
  • मिठाई, फल और नैवेद्य
  • करवा चौथ की व्रत कथा की पुस्तक
  • छलनी
  • चंद्रमा को अर्घ्य देने के लिए जल
  • पूजा के लिए लाल या पीला कपड़ा
  • दक्षिणा और अपनी परंपरा के अनुसार सुहाग सामग्री

स्थानीय रीति के अनुसार करवा, ढक्कन, गेहूँ, बायना और अन्य सामग्री भी रखी जा सकती है। पूजा सामग्री की सूची में परिवार की प्रचलित परंपरा को प्राथमिकता दें।

4. करवा चौथ की पूजा-विधि

करवा चौथ पर पूजा की विधि परिवार और क्षेत्र के अनुसार थोड़ी अलग हो सकती है। सामान्य रूप से पूजा इस प्रकार की जाती है।

चरण 1: सुबह सरगी ग्रहण करें

सूर्योदय से पहले सरगी खाएँ और अपनी परंपरा के अनुसार व्रत का संकल्प लें। इसके बाद दिनभर व्रत रखें।

चरण 2: स्नान और श्रृंगार करें

सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। अपनी सुविधानुसार मेहंदी, चूड़ियाँ, सिंदूर और अन्य श्रृंगार करें। पूजा की सामग्री पहले से तैयार रखें।

चरण 3: पूजा स्थल तैयार करें

शाम को स्वच्छ स्थान पर माता पार्वती, भगवान शिव और भगवान गणेश की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें। पूजा की थाली सजाएँ और करवा में जल भरकर रखें।

चरण 4: करवा चौथ की कथा सुनें

पूजा के समय करवा चौथ की व्रत कथा सुनें या पढ़ें। कई परिवारों में महिलाएँ सामूहिक रूप से बैठकर कथा सुनती हैं और पूजा करती हैं।

चरण 5: माता पार्वती और शिव परिवार की पूजा करें

रोली, अक्षत, पुष्प, दीपक और नैवेद्य आदि से अपनी परंपरा के अनुसार पूजा करें। पति की लंबी आयु, परिवार की सुख-समृद्धि और वैवाहिक जीवन की मंगलकामना करें।

चरण 6: चंद्र दर्शन करें

रात में चंद्रमा दिखाई देने पर अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार छलनी से चंद्र दर्शन करें। कई परिवारों में महिलाएँ छलनी से पहले चंद्रमा और फिर अपने पति का चेहरा देखती हैं।

चरण 7: चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोलें

चंद्रमा को जल अर्पित करें और प्रार्थना करें। इसके बाद परिवार की परंपरा के अनुसार पति या परिवार के किसी सदस्य से जल ग्रहण करके व्रत का पारण करें और भोजन करें।

ध्यान दें कि बादल होने पर चंद्र दर्शन में देरी हो सकती है। ऐसी स्थिति में अपने परिवार की परंपरा और स्थानीय धार्मिक मार्गदर्शन का पालन करें।

5. करवा चौथ व्रत के जरूरी नियम

करवा चौथ से जुड़े कुछ पारंपरिक नियम हैं, जिन्हें व्रत रखने वाली महिलाएँ अपनी पारिवारिक मान्यताओं के अनुसार अपनाती हैं।

1. व्रत का संकल्प लें: सुबह व्रत शुरू करने से पहले श्रद्धापूर्वक संकल्प लें।

2. सरगी सूर्योदय से पहले खाएँ: पारंपरिक रूप से सरगी के बाद व्रत रखा जाता है।

3. पूजा सामग्री पहले तैयार रखें: शाम की पूजा से पहले करवा, दीपक, फूल, कथा और छलनी जैसी जरूरी वस्तुएँ व्यवस्थित कर लें।

4. व्रत कथा सुनें: पूजा के दौरान करवा चौथ की कथा सुनने या पढ़ने की परंपरा है।

5. चंद्रमा को अर्घ्य दें: चंद्र दर्शन के बाद जल अर्पित करना इस पर्व की प्रमुख रस्म है।

6. पारिवारिक परंपराओं का सम्मान करें: व्रत की विधि, बायना और अन्य रस्में परिवारों के अनुसार भिन्न हो सकती हैं।

7. स्वास्थ्य का ध्यान रखें: निर्जला व्रत सभी के लिए उपयुक्त नहीं होता। यदि आपको कोई बीमारी है, आप गर्भवती हैं, स्तनपान करा रही हैं या नियमित दवाएँ लेती हैं, तो व्रत रखने से पहले चिकित्सकीय सलाह लें। कमजोरी, चक्कर या अस्वस्थता होने पर स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें।

धार्मिक आस्था का पालन श्रद्धा और विवेक के साथ करना चाहिए। स्वास्थ्य को जोखिम में डालना आवश्यक नहीं है।

6. करवा चौथ की तैयारी एक दिन पहले कैसे करें?

यदि आप चाहती हैं कि करवा चौथ का दिन बिना किसी परेशानी के बीते, तो एक दिन पहले ही अपनी तैयारी पूरी कर लें।

  • अपनी साड़ी, लहंगा या अन्य पूजा के वस्त्र तैयार रखें।
  • मेहंदी लगवाने या लगाने की व्यवस्था पहले कर लें।
  • सरगी की सामग्री खरीदकर व्यवस्थित कर लें।
  • पूजा की थाली, करवा, छलनी और कथा की पुस्तक जाँच लें।
  • फल, मिठाई और पूजा के लिए जरूरी वस्तुएँ खरीद लें।
  • अपने शहर के चंद्रोदय और पूजा मुहूर्त की जानकारी नोट कर लें।
  • शाम की पूजा और पारण के लिए घर में पहले से व्यवस्था कर लें।

इन छोटी-छोटी तैयारियों से आप पूरे दिन पूजा और पर्व के आनंद पर ध्यान दे पाएँगी।

7. करवा चौथ का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व

करवा चौथ को वैवाहिक प्रेम, विश्वास, मंगलकामना और पारिवारिक एकता से जुड़ा पर्व माना जाता है। माता पार्वती को अखंड सौभाग्य का प्रतीक मानकर पूजा की जाती है और भगवान शिव से सुखी वैवाहिक जीवन की प्रार्थना की जाती है।

चंद्रमा को अर्घ्य देने की परंपरा इस व्रत का विशेष हिस्सा है। छलनी से चंद्र दर्शन, व्रत कथा सुनना और परिवार के साथ पूजा करना इस पर्व को भावनात्मक और सांस्कृतिक रूप से खास बनाता है।

आज के समय में करवा चौथ मनाने के तरीके बदल रहे हैं, लेकिन इसके मूल में श्रद्धा, प्रेम, परस्पर सम्मान और परिवार के लिए मंगलकामना का भाव बना हुआ है।

निष्कर्ष

करवा चौथ 2026 की तैयारी में सरगी, सोलह श्रृंगार, पूजा सामग्री और व्रत के नियमों की जानकारी होना उपयोगी है। यदि आप पहले से अपनी सामग्री तैयार कर लें, पूजा का समय देख लें और स्वास्थ्य का ध्यान रखें, तो पर्व को अधिक व्यवस्थित और आनंदपूर्ण तरीके से मना सकती हैं।

इस वर्ष करवा चौथ 29 अक्टूबर 2026, गुरुवार को मनाया जाएगा। पूजा और चंद्रोदय का सटीक समय अपने शहर के पंचांग के अनुसार अवश्य जाँचें।

OMASTTRO UNIVERSE की ओर से आप सभी को करवा चौथ की हार्दिक शुभकामनाएँ। माता पार्वती और भगवान शिव की कृपा से सभी के जीवन में प्रेम, सुख, शांति और समृद्धि बनी रहे।

ॐ नमः शिवाय। 🙏

To Top