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ज्योतिष के पाँच सबसे खतरनाक योग

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ज्योतिष के पाँच सबसे खतरनाक योग


कुंडली में बनने वाले कुछ ऐसे योग होते हैं जो जीवन को बदल देने का सामर्थ्य रखते हैं। इनमें कुछ योग राजयोग कहलाते हैं जो जीवन में सफलता देते हैं, तो कुछ योग जीवन में असफलता और समस्याओं को जन्म देते हैं। इन्हें दुर्योग या अशुभ योग अथवा दोष कहा जाता है। 

वैदिक ज्योतिष में ग्रहों और नक्षत्रों के आधार पर अनेक प्रकार के संयोग देखने को मिलते हैं, जो व्यक्ति के जीवन को प्रभावित करने की सामर्थ्य रखते हैं। अच्छे योगों के बारे में आपने सदैव पढ़ा होगा। आज हम आपको कुछ ऐसे विशेष ग्रह योगों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्हें ज्योतिष शास्त्र में अशुभ योगों में गिना जाता है और, किसी व्यक्ति की कुंडली में इनकी उपस्थिति उसके जीवन को नकारात्मक रूप से प्रभावित करती है। 

 व्यक्ति के जीवन में अनेक समस्याएं उसे पीड़ित करती हैं।आइए जानते हैं क्या है वैदिक ज्योतिष में उपस्थित ऐसे पाँच सबसे खतरनाक योग, जो किसी भी व्यक्ति के जीवन में समस्याओं का अंबार लगा देते हैं। 

केमद्रुम योग 

वैदिक ज्योतिष के अनुसार केमद्रुम दोष चंद्रमा की विशेष स्थिति के कारण निर्मित होता है। जन्म कुंडली में चंद्र जिस भाव अथवा राशि में स्थित होता है, उससे दूसरे और बारहवें भाव में सूर्य के अतिरिक्त कोई भी ग्रह न हो अर्थात चंद्रमा जिस राशि में हो उससे दूसरे और बारहवें (दोनों) भाव में कोई भी ग्रह उपस्थित ना हो तो केमद्रुम दोष का निर्माण होता है। यदि इन भावों में राहु अथवा केतु में से कोई भी ग्रह स्थित हो तो उनकी उपस्थिति होने से भी केमद्रुम दोष माना जाएगा।

वराहमिहिर ने अपने मुख्य ग्रंथ बृहद्जातक में तथा मंत्रेश्वर महाराज ने भी केमद्रुम योग के बारे में बहुत कुछ बताया है। उनके अनुसार इस योग का फल यह है कि, व्यक्ति मलिन, दुखी, निर्धन और दूसरों के अधीन काम करने वाला होता है। शास्त्रों में कहा गया है कि यदि किसी की कुंडली में केमद्रुम दोष विद्यमान हो, तो भले ही वह राजा के घर में जन्मा हो, उसके जीवन में कठिनाइयाँ और समस्याएं आती रहती हैं। यह योग जीवन में गरीबी, कठिनाइयाँ, संघर्ष और मानसिक तनाव देता है। ऐसा व्यक्ति संघर्षों का सामना करते हुए बड़ा होता है। 

  • चंद्रमा का संबंध भगवान शिव से होता है, इसलिए भगवान शिव की उपासना करें और उन्हें प्रतिदिन जल अथवा गाय के दूध से अभिषेक करना सर्वोत्तम उपाय माना जाता है।
  • शिव सहस्त्रनाम स्त्रोत्र का पाठ करना और रुद्राभिषेक करना तथा महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना भी केमद्रुम योग के दुष्प्रभावों को कम करने में कारगर माना गया है।
  • केमद्रुम योग वाले जातकों को पूर्णिमा के दिन व्रत रखना चाहिए और यदि यह पूर्णिमा सोमवार से शुरू हो तो अत्यंत उत्तम होता है।
  • ऐसे व्यक्तियों को, जिनकी कुंडली में केमद्रुम योग बन रहा है, श्री यंत्र की स्थापना करके विधिवत उसकी पूजा अर्चना करनी चाहिए और श्री सूक्त का नियमित पाठ करना चाहिए।
  • केमद्रुम दोष वाली स्थिति में आपको अपनी माताजी का पूरा सम्मान करना चाहिए और उन्हें तनिक भी कष्ट नहीं देना चाहिए तथा उनकी सेवा करनी चाहिए।
  • एक अन्य उपाय के रूप में घर में दक्षिणावर्ती शंख की स्थापना करके नियमित जल भरकर उस जल से माता महालक्ष्मी की मूर्ति को स्नान कराएं तथा बाद में उसी से सूर्य देव को अर्घ्य दें।
  • चंद्र देव के बीज मंत्रों का जाप करना भी अत्यंत अनुकूल होता है।


चांडाल दोष 

चांडाल योग किसी भी कुंडली में तब निर्मित होता है, जब किसी एक राशि अथवा भाव में बृहस्पति और राहु एक साथ स्थित होते हैं, या कुंडली में इनका एक दूसरे से किसी भी प्रकार से संबंध स्थापित होता है। इन दोनों का संयोग गुरु चांडाल योग या चांडाल दोष को जन्म देता है, जो कि कुंडली में एक बहुत बड़ा कुयोग माना जाता है।

गुरु चांडाल योग का प्रभाव काफी व्यापक होता है। यह अपना प्रभाव मुख्य रूप से चेतना और ज्ञान पर डालता है, जिससे व्यक्ति के व्यवहार में नकारात्मकता आती है और वह असफलताओं से घिर जाता है। 

इस योग के कारण जीवन में अनेक प्रकार की सुख-सुविधाओं में तथा जीवन में आगे बढ़ने में परेशानियां उठानी पड़ती हैं। इस योग से प्रभावित जातक काफी अधिक भौतिकतावादी होता है, और वह अपने जीवन में नकारात्मकता की ओर बढ़ता है। वह अपनी महत्वाकांक्षाओं की पूर्ति के लिए किसी भी हद तक जा सकता है, और धन कमाने की तीव्र इच्छा रखता है, जिससे सही और गलत में भेद करना उसे पसंद नहीं आता। ऐसे में व्यक्ति चारित्रिक रूप से पतन का शिकार होता है तथा कुछ विशेष परिस्थितियों में हिंसक एवं कट्टरवादी भी हो सकता है।


  • चांडाल योग को शांत करने का सबसे अच्छा तरीका है गुरु चांडाल दोष निवारण पूजा। वास्तव में यह एक ऐसी पूजा है, जिससे गुरु चांडाल योग का असर बहुत कम हो जाता है, इसलिए आपको गुरु चांडाल योग शांति पूजा किसी योग्य ब्राह्मण से करानी चाहिए।
  • आपको कुंडली में बृहस्पति की शुभ स्थिति हो तो ब्राह्मणों का सम्मान करना चाहिए और उन्हें दान दक्षिणा देनी चाहिए तथा गुरु समान लोगों का आदर करना चाहिए।
  • ऐसे लोगों को बृहस्पतिवार के दिन केले का वृक्ष लगाना चाहिए तथा उसकी पूजा करनी चाहिए।
  • यदि आपकी कुंडली में चांडाल योग बन रहा है तो आपको बृहस्पतिवार के दिन भगवान विष्णु की उपासना करनी चाहिए और उन्हें पीला चंदन अर्पित करना चाहिए।


  • राहु ग्रह की शांति करानी चाहिए तथा राहु के बीज मंत्रों का जाप करना चाहिए।
  • प्रतिदिन नियमित रूप से अपनी नाभि, गर्दन, मस्तक, कान तथा जीभ पर केसर लगाना चाहिए।
  • बृहस्पतिवार के दिन विद्यार्थियों को शिक्षा से संबंधित सामग्री का दान करना चाहिए।
  • यदि यह चांडाल योग आपकी कुंडली में अत्यधिक अशुभ प्रभाव दे रहा है तो आपको परिवार के किसी वृद्ध व्यक्ति की सलाह लेकर ही जीवन में कोई कार्य करना चाहिए।
  • गौ माता की नियमित रूप से सेवा करें और उन्हें गेहूं तथा हरी घास खिलाएं।
  • वटवृक्ष अर्थात बरगद के पेड़ की जड़ में कच्चा दूध अर्पित करें।
  • भगवान श्री गणेश तथा माता सरस्वती की नियमित आराधना भी चांडाल योग के दुष्प्रभावों से आपको बचाती है।


मांगलिक दोष 

मांगलिक दोष को अधिकतर लोग पहचानते हैं क्योंकि यह वैवाहिक जीवन में समस्याओं को जन्म देने वाला योग माना जाता है। जब किसी जातक की कुंडली में मंगल प्रथम, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम, अथवा द्वादश भाव में स्थित होता है तब वो मांगलिक दोष का निर्माण करता है। 

इस योग की उपस्थिति से व्यक्ति का दांपत्य जीवन पीड़ित अवस्था में रहता है। इस योग के प्रभाव से व्यक्ति के विवाह में विलंब होता है, बात होकर अटक जाती है या रिश्ता टूट जाता है अथवा विवाह होने के बाद भी शारीरिक, मानसिक और आर्थिक रूप से दांपत्य जीवन के सुख का ह्रास होता है। आप अपनी व्यक्तिगत मंगल दोष निवारण रिपोर्ट के द्वारा भी यह पता कर सकते हैं कि आपकी कुंडली में ऐसा योग बन रहा है या नहीं और इसके प्रभाव को खत्म करने के लिए क्या उपाय करना चाहिए।

  • इस दोष का परिहार करने के लिए व्यक्ति की मांगलिक दोष की शांति कराई जाती है।
  • विशेष स्थिति में कुंभ अथवा अर्क विवाह किया जाता है।
  • ऐसे व्यक्ति को मंगल चंडिका स्तोत्र का प्रतिदिन पाठ करना चाहिए।
  • केसरिया रंग के गणपति घर लाकर प्रतिदिन उनकी पूजा करनी चाहिए।
  • बंदरों व कुत्तों को गुड़ व आटे से बनी मीठी रोटी खिलाएँ। 
  • चाँदी का बिना जोड़ का ढलवां कड़ा अपने हाथ में पहनना चाहिए।
  • महामृत्युजय मंत्र का जाप करें। 
  • माँ मंगला गौरी की आराधना से भी मंगल दोष दूर होता है
  • कार्तिकेय जी की पूजा से मंगल दोष के दुष्प्रभाव कम होते हैं
  • मंगली कन्यायें गौरी पूजन तथा श्रीमद्भागवत के 18 वें अध्याय के नवम् श्लोक का पाठ अवश्य करें। 
  • यदि कन्या मांगलिक है तो विवाह से पूर्व कन्या का विवाह शास्त्रीय विधि द्वारा प्राण प्रतिष्ठित श्री विष्णु प्रतिमा से करे, तत्पश्चात विवाह करें।
  • आटे की लोई में गुड़ रखकर गाय को खिलाएँ। 
  • मांगलिक जातक को मांगलिक से ही शादी करनी चाहिए।


अंगारक दोष 

वैदिक ज्योतिष के अनुसार अंगारक दोष का निर्माण किसी भी कुंडली में उस स्थिति में होता है, जब एक ही भाव में मंगल ग्रह के साथ राहु अथवा केतु उपस्थित हों। इसके अलावा, यदि मंगल का दृष्टि सम्बन्ध भी राहु अथवा केतु से हो रहा हो तो भी इस योग का निर्माण हो सकता है। आमतौर पर अंगारक दोष को एक बुरा और अशुभ योग माना जाता है और इससे जीवन में समस्याओं की बढ़ोतरी होती है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार अंगारक दोष बुरे योगों में सम्मिलित किया गया है। अंगारक की प्रकृति से समझें तो अंगारे जैसा फल देने वाला योग बनता है। यह जिस भी भाव में बनता है, उस भाव के कारकत्वों को नष्ट करने की क्षमता रखता है। 


इस योग के प्रभाव से व्यक्ति के स्वभाव में परिवर्तन आते हैं, और उसमें गुस्से की अधिकता हो सकती है। यह योग व्यक्ति के निर्णय लेने की क्षमता को प्रभावित करता है और वह अपने क्रोध तथा दुर्घटना आदि के कारण समस्याओं को निमंत्रण देता है। मंगल को भाई का कारक कहा जाता है, इसलिए इस योग के प्रभाव से कई बार व्यक्ति की अपने भाइयों से नहीं बनती तथा दुर्घटना होने की संभावना रहती है। इस प्रकार के योग वाले व्यक्तियों पर शत्रुओं का प्रभाव भी अधिक पड़ता है और वे मानसिक तनाव में बने रहते हैं।

  • किसी योग्य विद्वान से अंगारक योग निवारण पूजा कराना सबसे उपयुक्त माना जाता है क्योंकि इससे ग्रह शांत हो जाते हैं और उनके नकारात्मक प्रभाव कम हो जाते हैं।
  • मंगल राहु अंगारक योग अथवा मंगल केतु अंगारक योग उपाय के रूप में इन ग्रहों की शांति मंत्र जाप तथा हवन द्वारा कराना भी उत्तम परिणाम देता है। 
  • मंगल केतु अंगारक योग उपाय के रूप में मंगलवार के दिन हनुमान मंदिर में लाल रंग का झंडा लगाना चाहिये। 
  • अंगारक योग निवारण के लिए माता महालक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए और यह पूजा तब करनी चाहिए, जब चंद्रमा रोहिणी नक्षत्र में स्थित हो।
  • मंगलवार के दिन भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र कार्तिकेय की आराधना करने से भी अंगारक दोष से मुक्ति मिलती है।
  • अंगारक योग निवारण के लिए आप बजरंग बाण का नियमित पाठ कर सकते हैं और हनुमान जी को चोला चढ़ा सकते हैं।
  • यदि मंगल और राहु दोनों ही अशुभ परिणाम दे रहे हों तो मंगल और राहु का दान करना चाहिए। 
  • अपने शरीर पर चाँदी धारण करें क्योंकि इससे इन दोनों ही ग्रहों को शांत करने में मदद मिलती है।
  • समय-समय पर अपने भाइयों की मदद करें और अपने ससुराल पक्ष से अपने संबंध सुधारें।
  • राह के कुत्तों को मीठी रोटी खिलानी चाहिए।
  • अंगारक योग का उपाय यह भी है कि आप अपने दाहिने हाथ में तांबे का कंगन पहनें और ॐ अं अंगारकाय नमः मंत्र का 108 बार जाप करें।
  • आप रात को सोते समय अपने सिरहाने या तकिए के निकट तांबे के जग अथवा लोटे में पानी भर कर रखें और सुबह किसी काँटे वाले पौधे या कैक्टस में इस पानी को डाल दें।
  • अनामिका उंगली में मंगलवार के दिन तांबे की अंगूठी पहनना भी अच्छा परिणाम देता है।


विष योग

किसी भी जातक की कुंडली में विष योग तब निर्मित होता है जब कुंडली में शनि और चंद्रमा का दृश्य अथवा युति संबंध बनता है, चंद्रमा को अमृत समान माना जाता है जबकि  चंद्रमा पर शनि की दृष्टि से विष योग का निर्माण कर देती है।

विष योग के बारे में कहा गया है कि ऐसा जातक जीवन से निराश हो जाता है। निराशा तब आती है जब मनोमस्तिष्क सही ढंग से साथ नहीं देता, ज्ञान बाधित हो जाता है। तात्पर्य यह कि विष योग विचारशून्यता देता है। यह कुंडली के जिस भाव में निर्मित होता है उस भाव से संबंधित फलों को छीन कर देता है और उससे संबंधित रिश्तो में भी दरार आ सकती है व्यक्ति स्वयं को अकेला महसूस करता है और इस वजह से मानसिक तनाव और डिप्रेशन में भी जा सकता है।

  • विष योग के उपाय के लिए चंद्रमा और शनि के जाप करने चाहिए।
  • भगवान शिव का रुद्राभिषेक समय-समय पर कराते रहना चाहिए और जातक के जन्म दिवस के अवसर पर अवश्य कराना चाहिए।
  • जातक को रात्रि में दूध पीने से बचना चाहिए।
  • अपने खान-पान पर विशेष ध्यान देना चाहिए बासी भोजन से परहेज करना चाहिए।
  • ध्यान एवं योग का सहारा लेना चाहिए जिससे मानसिक स्थिति मजबूत बन सके।
  • विकट स्थिति होने पर महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना चाहिए।

आशा है कि आपको इस लेख में दी गई जानकारी पसंद आई होगी। OmAsttro का हिस्सा बनने के लिए आप सभी का धन्यवाद।

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