साल का पहला सूर्य ग्रहण 2026 फरवरी में, क्या भारत से दिखाई देगा? जानें समय और प्रभाव!

kanishk Omasttro
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सूर्य ग्रहण 2026: वैदिक ज्योतिष में सूर्य ग्रहण क एक बेहद रहस्यमयी और प्रभावशाली खगोलीय घटना माना गया है। जब सूर्य ग्रहण लगता है, तो केवल आकाश में ही नहीं बल्कि धरती और मानव जीवन पर भी इसका गहरा अशर देखने को मिलता है। ग्रहण के समय वातावरण में अदृश्य ऊर्जा का प्रवाह तेज हो जाता है, जिससे प्रकृति के साथ-साथ मन और विचारों पर भी प्रभाव पड़ता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूर्य ग्रहण के दौरान किए गए कार्यों पर विशेष फल मिता है, वहीं कुछ कार्य वर्जित भी माने जाते है। 

अब जब हम नए वर्ष 2026 की बात करते हैं, तो इसकी शुरुआत ही एक खास खगोलीय घचना से होने जा रही है। वर्ष 2026 में लगने वाला पहला सूर्य ग्रहण न सिर्फ ज्योतिष दृष्टि से महत्वपूर्ण होगा, बल्कि इसके प्रभाव को लेकर लोगों में जिज्ञासा भी बनी हुई है।

आइए जानते हैं यह सूर्य ग्रहण कब लगेगा, भारत में दिखाई देगा या नहीं और इसका क्या प्रभाव पड़ सकता है।

सूर्य ग्रहण 2026: क्या होता है ग्रहण?

ग्रहण केवल आकाश में होने वाली एक सामान्य घटना नहीं है, बल्कि या  ब्रह्मांड के तीन महत्वपूर्ण पिंडों सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी के बीच बनने वाला एक विशेष और रहस्यमयी संयोग होता है। जब इन खगोलीय पिंड़ों की स्थिति ऐसी बन जाती है कि उनकी रोशनी एक-दूसरे से ढ़क जाती है, तब ग्रहण की स्थिति उत्पन्न होती है। यही वजह है कि कभी चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी के बीच आकर सूर्य की किरणों को रोक देता है, तो कभी पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आकार चंद्रमा की चमक को प्रभावित करती है। 

इस अद्भुत खगोलयी घटना को ही ग्रहण कहा जाता है। धार्मिक दृष्टि से ग्रहण को विशेष नियमों और परंपराओं से जोड़ा गया है, वहीं ज्योतिष शास्त्र में इसे बड़े बदलावों और प्रभावों का संकेत माना जाता है। वैज्ञानिक रूप से भी ग्रहण का अध्ययन अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसके माध्यम से ब्रह्मांड और खगोलीय संरचना से जुड़ी कई जानकारियाँ प्राप्त होती हैं। ग्रहण मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं, सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण। अब आइए आगे जानते हैं कि चंद्र ग्रहण क्या होता है और इसके कितने प्रकार होते हैं।

सूर्य ग्रहण 2026: तिथि व समय

ज्योतिषियों के मुताबिक, 2026 का पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी की दोपहर 03 बजकर 26 मिनट पर लगेगा और यह रात 07 बजकर 57 मिनट पर समाप्त होगा। यह एक कंकण सूर्यग्रहण होगा। यह ग्रहण 2026 कुंभ राशि और धनिष्ठा नक्षत्र  में घटित होगा।

तिथिदिन व दिनांकसूर्य ग्रहण प्रारंभ समयसूर्य ग्रहण समाप्त समयदृश्यता का क्षेत्र
फाल्गुन मास कृष्ण पक्ष अमावस्यामंगलवार, 17 फरवरी 2026दोपहर 15:26 बजे सेरात्रि 19:57 बजे तकसाउथ अफ्रीका, बोत्सवाना, जांबिया, जिंबाब्वे, मोजांबिक, दक्षिण अफ्रीका के दक्षिणी देशों, नामीबिया, मॉरीशस, तंजानिया, दक्षिण अमेरिका के दक्षिणी देशों चिली और अर्जेंटीना, आदि और अंटार्कटिका (भारत में दृश्यमान नहीं)

नोट: उपरोक्त तालिका में दिया गया ग्रहण 2026 का समय भारतीय समय के अनुसार है। यह पहला सूर्य ग्रहण भारत में दृश्य मान नहीं होगा इसलिए भारत में सूर्य ग्रहण का कोई भी धार्मिक प्रभाव नहीं होगा और न ही इसका सूतक काल प्रभावी होगा।

क्या भारत में दिखाई देगा सूर्य ग्रहण

साल का पहला सूर्य ग्रहण भारत में दृश्यमान नहीं यानी भारत में दिखाई नहीं देगा। यह ग्रहण दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण अर्जेंटीना और अंटार्कटिका में दिखाई देने वाला है। हालांकि, यह सूर्य ग्रहण भारत में नहीं दिखेगा, जिस कारण इसका सूतक काल भी प्रभावी नहीं होगा।

सूतक काल क्या है

सूतक काल वह समय होता है, जो किसी ग्रहण से पहले शुरू हो जाता है और ग्रहण समाप्त होने तक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूतक काल में वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है, इसलिए इश दौरान शुभ और मांगलिक कार्य करना वर्जित माना जाता है।

सामान्य रूप से सूर्य ग्रहण से लगभग 12 घंटे पहले और चंद्र ग्रहण से लगभग 9 घंटे पहले सूतक काल लग जाता है। इस समय पूजा-पाठ, मूर्ति स्पर्श, भोजन पकाना या खाना, तथा नए कार्य शुरू करना उचित नहीं माना जाता। सूतक काल समाप्त होने के बाद स्नान-ध्यान कर पूजा-पाठ किया जाता है और तब ही सामान्य दिनचर्या फिर से शुरू की जाती है। धार्मिक दृष्टि से सूतक काल को संयम और सावधानी का समय माना गया है।

कब लगता है सूर्य ग्रहण

सूर्य ग्रहण अमावस्या के दिन घटित होने वाली एक विशेष खगोलीय घटना है। इस दिन चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है, जिसके कारण सूर्य की किरणें पृथ्वी तक पूरी या आंशिक रूप से नहीं पहुंच पातीं। जब चंद्रमा सूर्य को ढ़क लेता है, तब आकाश में सूर्य ग्रहण का दृश्च बनता है। यह दृश्य कभी आंशिक होता है और कभी पूर्ण, जो चंद्रमा की स्थिति और दूरी पर निर्भर करता है। 

हालांकि हर अमावस्या को सूर्य ग्रहण नहीं लगता है। इसका मुख्य कारण यह है कि चंद्रमा की कक्षा पृथ्वी की कक्षा के मुकाबले थोड़ी झुकी हुई होती है। इसलिए हर बार सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी एक सीध में नहीं आ पाते। केवल तभी सूर्य ग्रहण बनता है जब तीनों खगोलीय पिंड बिल्कुल एक सीधी रेखा में आ जाएं। इसी वजह से सूर्य ग्रहण साल में गिने-चुने अवसरों पर ही दिखाई देता है और इसे एक दुर्लभ एवं महत्वपूर्ण खगोलीय घटना माना जाता है।

सूर्य ग्रहण के प्रकार

सूर्य ग्रहण मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं। यह इस बात पर निर्भर करता है कि चंद्रमा सूर्य को कितनी मात्रा में ढक पा रहा है। 

पूर्ण सूर्य ग्रहण

यह तब लगता है जब चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह ढक लेता है। इस दौरान कुछ समय के लिए दिन में ही अंधेरा छा जाता है और आकाश में तारे तक दिखाई देने लगते हैं। यह सूर्य ग्रहण का सबसे दुर्लभ और प्रभावशाली रूप माना जाता है। 

आंशिक सूर्य ग्रहण 

यह तब होता है जब चंद्रमा सूर्य का केवल कुछ हिस्सा ही ढक पाता है। इसमें सूर्य का एक भाग दिखाई देता रहता है और रोशनी पूरी तरह समाप्त नहीं होती। यह ग्रहण कई बार भारत सहित विभिन्न क्षेत्रों में देखने को मिलता है। 

वलयाकार सूर्य ग्रहण 

यह उस स्थिति में बनता है जब चंद्रमा सूर्य के सामने तो आता है, लेकिन पृथ्वी से उसकी दूरी अधिक होने के कारण वह सूर्य को पूरी तरह ढक नहीं पाता। ऐसे में सूर्य के चारों ओर प्रकाश का एक चमकदार छल्ला दिखाई देता है, जिसे अग्नि वलय या रिंग ऑफ फायर कहा जाता है।

सूर्य ग्रहण 2026 के दिन क्या करें क्या न करें

क्या करें

  • ग्रहण से पहले ही स्नान कर लें और मन को शांत रखें।
  • ग्रहण काल में भगवान विष्णु या सूर्य देव का स्मरण करें।
  • मन ही मन मंत्र जाप करना शुभ माना जाता है, जैसे “ॐ नमः शिवाय”, “ॐ सूर्याय नमः” या विष्णु मंत्र।
  • ग्रहण समाप्त होने के बाद दोबारा स्नान करें और फिर पूजा-पाठ करें।
  • जरूरतमंदों को दान-पुण्य करें, जैसे अन्न, वस्त्र या धन।

क्या न करें

  • बिना सुरक्षा वाले चश्मे के सूर्य को न देखें, इससे आंखों को नुकसान हो सकता है।
  • ग्रहण काल में खाना पकाना या भोजन करना वर्जित माना जाता है।
  • पूजा-पाठ, मूर्ति स्पर्श और मंदिर जाना नहीं करना चाहिए।
  • किसी नए काम की शुरुआत, शादी-ब्याह या शुभ कार्य न करें।
  • बाल कटवाना, नाखून काटना या सिलाई-कढ़ाई जैसे कामों से बचें।
  • गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए और बाहर निकलने से बचना चाहिए।
  • घर में रखे पानी और खाने की चीज़ों को ग्रहण के बाद शुद्ध करके ही उपयोग करें।

गर्भवती महिलाएं भूलकर भी न करें ये काम

धार्मिक मान्यताओं और पारंपारिक अनुभवों के अनुसार सूर्य ग्रहण के समय गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। इस दौरान वातावरण में होने वाले बदलवों को देखते हुए कुछ काम करने से मना किया जाता है। आइए जानते हैं वो कौन से काम है।

  • सूर्य ग्रहण के समय घर से बाहर न निकलें और सीधे सूर्य को देखने की कोशिश बिल्कुल न करें।
  • ग्रहण काल में खाना पकाना या भोजन नहीं करना चाहिए।
  • काटने-छीलने वाले काम जैसे सब्जी काटना, फल काटना, सिलाई करना या धागा पिरोना वर्जित माना जाता है।
  • नाखून काटना या बाल कटवाना नहीं चाहिए।
  • ग्रहण के समय सोना नहीं चाहिए, बल्कि शांत बैठकर मंत्र जप या भगवान का स्मरण करना बेहतर माना जाता है।
  • नकारात्मक बातें सुनने, डरावनी कहानियां देखने या ज्यादा तनाव लेने से बचें।
  • ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और तब ही भोजन करें।

यह सभी सावधानियां परंपरा और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं। स्वास्थ्य से जुड़ी किसी भी शंका में डॉक्टर की सलाह लेना सबसे ज़रूरी होता है।

सूर्य ग्रहण के दिन जरूर करें ये ख़ास उपाय

धन वृद्धि के लिए

सूर्य ग्रहण शुरू होने से पहले कपड़े में थोड़े चावल, हल्दी और एक सिक्का बांध लें। ग्रहण समाप्त होने के बाद इसे अपने तिजोरी या पूजा स्थल में रख दें। मान्यता है कि इससे आर्थिक परेशानियां कम होती हैं।

नकारात्मक ऊर्जा दूर करने के लिए

ग्रहण के समय घर के मुख्य द्वार पर गंगाजल छिड़क दें या पानी में थोड़ी हल्दी डालकर छिड़काव करें। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।

रोग और कष्ट दूर करने के लिए

ग्रहण काल में मन ही मन  “ॐ नमः शिवाय” या “ॐ सूर्याय नमः” का जाप करें। माना जाता है कि इससे मानसिक शांति और स्वास्थ्य में सुधार आता है। 

संतान सुख के लिए (गर्भवती महिलाओं के लिए) 

गर्भवती महिला ग्रहण के समय पेट पर लाल कपड़ा रखकर भगवान का स्मरण करें। यह परंपरागत मान्यता है, जिससे मन को शांति मिलती है।

ग्रह दोष शांति के लिए 

ग्रहण समाप्त होने के बाद गरीबों को अन्न, गुड़, तांबा या लाल वस्त्र का दान करें। इससे सूर्य से जुड़े दोष शांत होते हैं, ऐसा माना जाता है। 

घर की शुद्धि के लिए 

ग्रहण के बाद पूरे घर में धूप-दीप या गूगल जलाएं और स्नान करके ही रसोई का उपयोग करें।

इसी आशा के साथ कि, आपको यह लेख भी पसंद आया होगा ॐ एस्ट्रो के साथ बने रहने के लिए हम आपका बहुत-बहुत धन्यवाद करते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1- वर्ष 2026 का पहला सूर्य ग्रहण कब लगेगा?

वर्ष 2026 का पहला सूर्य ग्रहण मंगलवार, 17 फरवरी 2026 को लगेगा। यह ग्रहण दोपहर 03:26 बजे शुरू होकर शाम 07:57 बजे तक रहेगा।

2- 2026 का पहला सूर्य ग्रहण किस प्रकार का होगा?

यह सूर्य ग्रहण वलयाकार (कंकण) सूर्य ग्रहण होगा, जिसमें सूर्य के चारों ओर प्रकाश का छल्ला दिखाई देता है।

3- क्या यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई देगा?

नहीं, वर्ष 2026 का यह पहला सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। यह ग्रहण दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका के कुछ हिस्सों और अंटार्कटिका में दृश्य होगा। 

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