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कब है गीता जयंती? जानें तिथि, मुहूर्त, महत्व और सही पूजा विधि!

Om Asttro Universe Team

 

गीता जयंती 2025: सनातन धर्म में हर व्रत एवं त्योहार को विशेष स्थान दिया गया है और इन्हीं में से एक है गीता जयंती। हिंदू धर्म के लिए गीता एक अत्यंत पवित्र और धार्मिक ग्रंथ है जो मनुष्य को जीवन के अंधकार के बीच रोशनी का मार्ग दिखाती है और अधर्म से धर्म के पथ पर लेकर जाती है इसलिए गीता जयंती को महत्वपूर्ण माना जाता है। 

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गीता जयंती के दिन भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का ज्ञान दिया था। Omasttro के इस ब्लॉग में हम आपको “गीता जयंती 2025” से जुड़ी समस्त जानकारी विस्तारपूर्वक प्रदान करेंगे जैसे तिथि और समय आदि। साथ ही, गीता जयंती की पूजा विधि और इस दिन किए जाने वाले कार्यों के बारे में भी आपको बताएंगे। तो आइए बिना देर किए आगे बढ़ते हैं और शुरुआत करते हैं “गीता जयंती 2025” स्पेशल इस ब्लॉग की। 

गीता जयंती 2025: तिथि एवं पूजा मुहूर्त 

हिंदू पंचांग के अनुसार, गीता जयंती का पर्व हर वर्ष मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाता है। मान्यता है कि मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की एकादशी पर भगवान कृष्ण ने युद्ध भूमि में अर्जुन को गीता का ज्ञान दिया था इसलिए इस तिथि को गीता जयंती कहा जाता है। इस दिन गीता जयंती के साथ-साथ मोक्षदा एकादशी भी होती है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार, गीता जयंती प्रत्येक वर्ष नवंबर या दिसंबर में आती है। इस दिन भक्तजन श्रीकृष्ण की पूजा और व्रत करते हैं। आइए अब हम जानते हैं गीता जयंती 2025 की तिथि और मुहूर्त। 

गीता जयंती की तिथि: 01 दिसंबर 2025, सोमवार
एकादशी तिथि का आरंभ: 30 नवंबर 2025 की रात 09 बजकर 29 मिनट पर 

एकादशी तिथि समाप्त: 01 दिसंबर 2025 की शाम 07 बजकर 01 मिनट तक 

नोट: इस साल गीता जयंती की 5162वीं वर्षगांठ मनाई जाएगी। 



गीता जयंती 2025 का धार्मिक महत्व 

हिंदू धर्म में मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी को मोक्षदा एकादशी और गीता जयंती के रूप में मनाया जाता है। धर्मग्रंथों के अनुसार, द्वापर युग में भगवान विष्णु के अवतार श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र के मैदान में अपने परम शिष्य अर्जुन को गीता का ज्ञान दिया था। गीता को अत्यंत पवित्र ग्रंथ माना जाता है जिसमें जीवन के दर्शन, भक्ति योग, ज्ञान योग और कर्मयोग का विस्तृत सार मिलता है। यह ग्रंथ आपको धार्मिक दृष्टिकोण के साथ-साथ जीवन के हर पहलू में मार्गदर्शन प्रदान करता है।

इस शुभ दिन को दुनियाभर में भक्तों द्वारा धूमधाम से मनाया जाता है। गीता जयंती के अवसर पर लक्ष्मी नारायण और भगवान श्रीकृष्ण की पूजा विधि-विधानपूर्वक करने से भक्त को मोक्ष की प्राप्ति होती हैं। साथ ही, श्रीकृष्ण व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। गीता जयंती पर एकादशी व्रत किया जाता है और भक्ति गीत गाए जाते हैं। साथ ही, धार्मिक समारोह और गीता का पाठ किया जाता है। इस दिन व्यक्ति गीता में दिए गए सार को अपने दैनिक जीवन में पालन करने की शपथ लेता है।  

आइए अब हम आपको अवगत करवाने जा रहे हैं गीता जयंती पर किन मंत्रों का जाप करना चाहिए। 

गीता जयंती 2025 पर करें श्रीकृष्ण के इन मंत्रों का जाप 

  1. ॐ कृष्णाय नमः
  1. ॐ श्री कृष्णः शरणं ममः
  1. ॐ नमो भगवते तस्मै कृष्णाया कुण्ठमेधसे।

         सर्वव्याधि विनाशाय प्रभो माममृतं कृधि।।

  1. ॐ देव्किनन्दनाय विधमहे वासुदेवाय धीमहि तन्नो कृष्ण:प्रचोदयात
  1. हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे ।

हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे ।।

गीता जयंती 2025 की पूजा विधि

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, गीता जयंती के दिन भगवान कृष्ण की पूजा विधि-विधान से की जाती है जिससे आपको श्रीकृष्ण का आशीर्वाद मिल सके, इसलिए गीता जयंती पर पूजा इस विधि से करें:

  • गीता जयंती 2025 पर प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें। 
  • इसके पश्चात, श्रीकृष्ण का ध्यान करें और उन्हें फल, फूल, चंदन, धूप दिखाएं। साथ ही, श्रीकृष्ण के सामने दीपक जलाएं। 
  • भगवान की प्रतिमा के निकट गीता रखें और इस पवित्र ग्रंथ को चंदन का तिलक लगाकर उसकी पूजा करें। 
  • फिर, गीता के श्लोकों का पाठ करें और आरती करें।    मासिक अंक फल दिसंबर 2025: दिसंबर का महीना इन जातकों के लिए है ख़ास


गीता जयंती 2025 पर अवश्य करें ये 4 काम 

  • गीता जयंती के अवसर पर भक्तों को गीता द्वारा दिखाए गए मार्ग का अनुसरण करना चाहिए। 
  • धार्मिक ग्रंथ गीता के श्लोकों के द्वारा आप अपनी बुद्धि को इस प्रकार मज़बूत बना सकते हैं कि आप जीवन की समस्याओं पर आसानी से विजय पा सकते हैं।
  • गीता जयंती पर मोक्षदा एकादशी भी होती है इसलिए इस दिन शंख पूजा करना लाभदायक होता है। शंख पूजन से आपके आसपास की नकारात्मकता दूर होती है और मां लक्ष्मी की कृपा मिलती है।
  • श्रीकृष्ण के विराट स्वरूप की पूजा गीता जयंती पर करना शुभ माना जाता है। ऐसा करने से आपको शांति प्राप्त होती है और अधूरे कार्य भी निर्विघ्न पूर्ण होते हैं। 

आइए अब जान लेते हैं गीता जयंती पर कौन से काम नहीं करने चाहिए। 

गीता जयंती 2025 पर न करें ये काम

  • गीता जयंती के दिन तामसिक भोजन करने से बचना चाहिए। 
  • इस दिन मन में नकारात्मक विचार लेकर न आएं। 
  • गीता जयंती को एकादशी के दिन मनाया जाता है इसलिए इस दिन तुलसी में जल न चढ़ाएं और न ही तुलसी की पत्ती तोड़ें। 


इसी आशा के साथ कि, आपको यह लेख भी पसंद आया होगा Omasttro के साथ बने रहने के लिए हम आपका बहुत-बहुत धन्यवाद करते हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गीता जयंती पर क्या करें?

गीता जयंती 2025 पर धार्मिक ग्रंथ गीता का पाठ करें। 

मोक्षदा एकादशी कब है?

इस साल मोक्षदा एकादशी 01 दिसंबर 2025, सोमवार को मनाई जाएगी। 

गीता जयंती 2025 पर किसकी पूजा करें?

गीता जयंती पर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा की जाती है। 

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